करेंट अफेयर्स – मार्च, 2019

लोकपाल के आठ सदस्यों ने शपथ ग्रहण की

हाल ही में लोकपाल के नव-नियुक्त आठ सदस्यों ने शपथ ग्रहण की, उन्हें देश के प्रथम लोकपाल जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष ने शपथ दिलाई। जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष लोकपाल के चेयरमैन है। लोकपाल में एक चेयरमैन तथा 8 सदस्यों का प्रावधान है। नियमों के अनुसार लोकपाल के आठ सदस्यों में से चार सदस्य न्यायिक होने चाहिए।

लोकपाल के चार न्यायिक सदस्य विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायधीश हैं – जस्टिस दिलीप बी. भोसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी तथा अजय कुमार त्रिपाठी।

लोकपाल के चार गैर-न्यायिक सदस्य इस प्रकार हैं : अर्चना रामासुन्दरम (सशस्त्र सीमा बल की पहली महिला प्रमुख), दिनेश कुमार जैन (महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव), महेंद्र कुमार (पूर्व IRS अफसर) तथा इन्द्रजीत प्रसाद गौतम (गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अफसर) ।

हाल ही में न्यायधीश पिनाकी चन्द्र घोष ने भारत के प्रथम लोकपाल के रूप में शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई थी।

लोकपाल का अध्यक्ष बनने के लिए उम्मीदवार सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायधीश, सर्वोच्च न्यायालय का न्यायधीश अथवा भ्रष्टाचार विरोधी नीति, लोक प्रशासन, वित्त, विधि अथवा प्रबंधन के क्षेत्र से कम से कम 25 वर्षों से जुड़ा हुआ व्यक्ति होना चाहिए। लोकपाल का न्यायिक सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार सर्वोच्च न्यायालय का न्यायधीश अथवा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायधीश होना चाहिए। लोक पाल के अन्य सदस्य कम से कम 25 वर्षों से भ्रष्टाचार विरोधी नीति, लोक प्रशासन, वित्त, विधि अथवा प्रबंधन के क्षेत्र से जुड़े हुए होने चाहिए।

लोकपाल खोज समिति के सदस्य

जस्टिस सखा राम सिंह यादव, पूर्व SBI चेयरपर्सन अरुंधती भट्टाचार्य, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर रंजित कुमार, पूर्व गुजरात पुलिस प्रमुख ललित के. पंवर, इलाहबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शब्बीरहुसैन एस. खांडवावाला, प्रसार भारती के चेयरपर्सन ए. सूर्य प्रकाश तथा इसरो के पूर्व प्रमुख ए. एस.किरण कुमार।

लोकपाल का चयन

खोज समिति द्वारा प्रस्तावित नामों की छंटनी प्रधानमंत्री मंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा किया जायेगा। इस चयन समिति में लोकसभा स्पीकर, लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश अथवा प्रमुख न्यायधीश द्वारा मनोनीत अन्य कार्यशील न्यायधीश तथा राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल हैं। राष्ट्रपति ने भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी को प्रतिष्ठित न्यायविद के रूप में मनोनीत किया है।

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1 अप्रैल से प्रभावी होगा बैंक ऑफ़ बड़ोदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय

बैंक ऑफ़ बड़ोदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय 1 अप्रैल, 2019 से प्रभावी होगा। इस विलय के बाद बैंक ऑफ़ बड़ोदा भारतीय स्टेट बैंक तथा आईसीआईसीआई बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जायेगा। यह विलय भारत में बैंकों का पहला त्रिपक्षीय विलय है।

मुख्य बिंदु

इस विलय से विश्व स्तरीय बैंक का निर्माण होगा तथा बैंक के कार्य में भी पैमाने की बचते होंगी तथा कार्यकुशलता में भी वृद्धि होगी। इससे बैंक के नेटवर्क में भी वृद्धि होगी तथा ग्राहकों को भी व्यापाक बैंकिंग सेवाएं मिल सकेंगी। इससे बैंक की पहुँच भी पहले से काफी अधिक बढ़ जाएगी। इस विलय के साथ ही देना बैंक और विजया बैंक की परिसंपत्ति, स्वामित्व, लाइसेंस, देनदारी तथा दायित्व इत्यादि बैंक ऑफ़ बड़ोदा को हस्तांतरित किये जायेंगे। इसके अलावा देना बैंक और विजया बैंक के सभी कर्मचारी भी बैंक ऑफ़ बड़ोदा में स्थानांतरित किये जायेंगे।

यह विलय इस वर्ष एक अप्रैल से प्रभावी हो जायेगा। इन तीन बैंकों के कर्मचारियों का वेतन तथा भत्ते पहले जैसे ही रहेंगे। विलय के बाद विजया बैंक के शेयरधारकों को विजया बैंक के प्रत्येक 1000 शेयर के बदले बैंक ऑफ़ बड़ोदा के 402 इक्विटी शेयर मिलेंगे। जबकि देना बैंक के शेयरधारकों को देना बैंक के प्रत्येक 1000 शेयर के बदले बैंक ऑफ़ बड़ोदा के 110 शेयर मिलेंगे।

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