करेंट अफेयर्स - मई, 2018

भारत,नीदरलैंड तथा स्वीडन ने एचआईवी / एड्स पर शोध सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत की

भारत , नीदरलैंड्स और स्वीडन ने एचआईवी / एड्स पर अपने पहले तरह के शोध सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत की। इसका उद्देश्य एचआईवी की बढ़ती वैश्विक महामारी को समझने के लिए बेहतर उपकरणों के विकास करने के लिए तीन देशों में पूरक अनुसंधान और विविध विशेषज्ञता का उपयोग करना है।

मुख्य तथ्य

शोध सहयोग कार्यक्रम अनुसंधान रुचि हेतु आबादी तक पहुंचने, तथा अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों एवं उन्नत भविष्यवाणी विश्लेषण का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित करेगा ताकि भौगोलिक विविधता और एचआईवी / एड्स वायरस के विभिन्न समूहों को बेहतर ढंग से समझ सकें। यह जेनेटिक, इम्यूनोलॉजिकल और व्यवहारिक निर्धारकों के आधार पर अलग-अलग मानव प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। निकट भविष्य में एचआईवी के रोकथाम और संभावित इलाज हेतु नए और बेहतर उपकरणों के विकास में यह जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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सरकार ने कृषि उत्पादन और पशुधन अनुबंध खेती अधिनियम, 2018 का मसौदा मॉडल जारी किया

किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अनुबंध खेती का एक मॉडल कानून मसौदा जारी किया है। यह न केवल कृषि फसलों के लिए तैयार किया गया है, बल्कि पशुपालन, डेयरी और पॉल्ट्री उत्पादों के क्षेत्र में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा।

इसका उद्देश्य उत्पादकता और लागत दक्षता में वृद्धि करके कृषि व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से निवेश को प्रोत्साहित करते हुए, पूर्व-सहमत मूल्य पर अपने उत्पाद के लिए आश्वासित बाजार (assured market) बनाकर किसानों के जोखिम को कम करना है।

मुख्य तथ्य

कृषि उत्पाद और पशुधन अनुबंध खेती एवं सेवाएं (प्रोत्साहन एवं सहूलियत) अधिनियम 2018 नामक कानून के इस मसौदे में ठेका खेती/सेवाओं को राज्यों के कृषि उत्पादन विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम के दायरे से बाहर रखने को कहा गया है। खरीदारों को इससे उनकी लेन-देन लागत पर पांच से 10 फीसदी की बचत करने में मदद मिलेगी।

अनुबंध खेती

अनुबंध खेती के तहत, कृषि उत्पादन (पशुधन और कुक्कुट सहित) खरीदारों (जैसे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों), और उत्पादकों (किसानों या किसान संगठनों) के बीच पूर्व-फसल समझौते (अनुबंध) के आधार पर किया जा सकता है। उत्पादक भविष्य में खरीदार को अनुबंध के अनुसार विशिष्ट मूल्य पर कृषि उपज बेच सकता है। अनुबंध खेती के तहत, बाजार मूल्य और मांग में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सकता है। खरीदार गुणवत्ता उत्पादन की अनुपलब्धता के जोखिम को कम कर सकता है।

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