करेंट अफेयर्स - मई, 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के लेह में जोजिला सुरंग परियोजना के निर्माण कार्य का उद्घाटन किया

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के लेह में 6,809 करोड़ रुपये की जोजिला सुरंग परियोजना के निर्माण का उद्घाटन किया। यह भारत और एशिया की सबसे लंबी और रणनीतिक द्वि-दिशात्मक सड़क सुरंग (strategic bi-directional road tunnel) होगी, जो जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, कारगिल और लेह के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

ज़ोजिला सुरंग

यह श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच -1 ए) पर 11,578 फीट की ऊंचाई पर स्थित होगा। जिसमे 14.150 किमी लंबी दो-लेन द्वि दिशात्मक सिंगल ट्यूब सुरंग (two-lane bi-directional single tube tunnel) शामिल है तथा इसमें 14.200 किमी लंबी समांतर सुरंग है, जो इसे एशिया की सबसे लंबी द्वि दिशात्मक सड़क सुरंग (bi-directional road tunnel) बनाती है। इसका उद्देश्य सुरक्षित, तेज़ और सस्ती कनेक्टिविटी प्रदान करना है जिससे ज़ोजिला पास को केवल पंद्रह मिनट में पार किया जा सकेगा।

सुरंग में निर्बाध बिजली आपूर्ति (uninterrupted power supply),आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था, पूरी तरह से ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, परिवर्तनीय संदेश संकेत (variable message signs), यातायात लॉगिंग उपकरण, ऊंचाई वाहन पहचान (height vehicle detection), सुरंग रेडियो सिस्टम आदि जैसी नवीनतम सुरक्षा सुविधाएं होंगी।

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आईआईटी कानपुर ने यूनाइटेड किंगडम सरकार की मदद से भारत का पहला ऊर्जा विनियमन केंद्र स्थापित किया

आईआईटी कानपुर ने यूनाइटेड किंगडम की सरकार की मदद से ऊर्जा विनियमन हेतु भारत का पहला केंद्र स्थापित किया है। भारत के इस अपने तरह के पहले केंद्र का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र की नीति तथा नियामक मामलों पर स्वतंत्र सलाह देना है।

ऊर्जा विनियमन केंद्र (सीईआर)

यह भारतीय विद्युत क्षेत्र में नियामक अनुसंधान तथा नेटवर्किंग बढ़ाने हेतु आईआईटी कानपुर के औद्योगिक एवं प्रबंधन इंजीनियरिंग विभाग की पहल है। सीईआर तथा इसके तहत पहचानी गई गतिविधियों (Identified activities) को अंतर्राष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी), यूनाइटेड किंगडम सरकार (यूके) द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।

सीईआर भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास, ऊर्जा की मांग में वृद्धि, ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और बिजली तक पहुंच जैसे मुद्दों के समाधान प्रदान करने वाली नियामक संस्थानों तथा हितधारकों के शोध की आवश्यकता पर केंद्रित है।

यह नियामक तथा अकादमिक संस्थानों के बीच बातचीत को प्रोत्साहित करता है। यह बिजली क्षेत्र में विनियमन तथा अनुसंधान का लक्ष्य रखता है।

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