करेंट अफेयर्स - मई, 2019

नारुहितो बने जापान के नए सम्राट

नारुहितो जापान के नए सम्राट बन गये हैं, हाल ही में उनके पिताजी अकिहितो ने राजपद को त्याग दिया था। नारुहितो के सम्राट बनने के साथ ही जापान में रेईवा काल आरम्भ हुआ। यह काल 1 मई, 2019 से आरम्भ हुआ।

नारुहितो

नारुहितो के पिताजी पिछले 200 वर्षों में राजपद का त्याग करने वाले पहले जापानी सम्राट हैं। 59 वर्षीय नारुहितो जापान के 126वें सम्राट बन गये हैं। नारुहितो का जन्म 23 फरवरी, 1960 को हुआ था। उनके राजपद सँभालने के बाद जापान में रेईवा काल का आरम्भ हो गया है।

अकिहितो

अकिहितो जापान के 125वें सम्राट रहे, सम्राट के रूप में उनका कार्यकाल 7 जनवरी, 1989 से 30 अप्रैल, 2019 तक रहा। उन्होंने अपने पिता हिरोहितो (शोवा) के निधन के बाद सम्राट का पद संभाला था। उनके पद संभालने के साथ हेइसेइ काल का आरम्भ हुआ था। जापान सरकार ने 2017 में उनके पदत्याग की घोषणा की थी। उन्होंने  यह निर्णय बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य ख़राब होने के कारण लिया था।

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राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समिति का गठन किया गया

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समिति का गठन किया गया। इस समिति के अध्यक्ष केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सचिव होंगे। इस समिति के अन्य सदस्य संयुक्त सचिव (थर्मल), उर्जा मंत्रालय, TERI महानिदेशक तथा IIT कानपूर के प्रोफेसर सचिदानंद त्रिपाठी होंगे।

मुख्य बिंदु

इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • यह एक पंचवर्षीय कार्यक्रम है, इसके द्वारा PM10 तथा PM 2.5 में 2024 तक 20-30% की कमी लायी जायेगी। इसके लिए 2017 को आधार वर्ष माना जायेगा।
  • इस कार्यक्रम में 23 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों  को शामिल किया गया है। इन शहरों का चुनाव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2011 से 2015 के बीच की वायु गुणवत्ता के आधार पर किया है।

नॉन-अटेनमेंट शहर

वे शहर नॉन-अटेनमेंट शहर हैं जिनमे राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक वायु गुणवत्ता निरंतर ख़राब रहती है। नॉन-अटेनमेंट शहरों की सूची में दिल्ली, वाराणसी, भोपाल, कलकत्ता, नॉएडा, मुजफ्फरपुर और मुंबई ऐसे बड़े शहर शामिल हैं।

  • इस कार्यक्रम के तहत केंद्र ने देश भर में वायु की गुणवत्ता के माप के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क को फैलाने का निश्चय किया है।
  • 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों में प्रदूषण के कारकों तथा उनके योगदान का अध्ययन किया जायेगा।
  • पर्यावरण मंत्रालय की सर्वोच्च समिति उचित सूचकों के आधार पर समय-समय पर प्रदूषण के कारकों की प्रगति की समीक्षा करती रहेगी।
  • प्रदूषण कारकों के आधार पर प्रत्येक शहर को क्रियान्वयन के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा जायेगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत रियल-टाइम डाटा कलेक्शन तथा तीन स्तरीय प्रणाली का उपयोग किया जायेगा तथा स्वच्छ वायु तकनीक के शोध को बढ़ावा दिया जायेगा।
  • राज्यों को ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में कार्य करना होगा और चार्जिंग अधोसंरचना पर बल देना होगा तथा BS-VI नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। राज्यों को अपने स्तर पर सार्वजनिक परिवहन को अधिक बढ़ावा देना होगा।

हालांकि यह कार्यक्रम राज्यों के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। पर्यावरणविदों ने इस कार्यक्रम को कानूनी रूप से बाध्य बनाने की मांग की है। प्रदूषण से करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए कड़े कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

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