करेंट अफेयर्स - मई, 2019

मध्य प्रदेश के ओरछा को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल किया गया

मध्य प्रदेश के ओरछा नामक शहर की वास्तुकला धरोहर को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है, इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एक प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा गया था।

मुख्य बिंदु

नियमों के अनुसार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के लिए पहले किसी धरोहर अथवा इतिहास ईमारत को संभावित सूची में होना चाहिए। संभावित सूची में शामिल होने के बाद यूनेस्को को एक और प्रस्ताव भेजा जाता है।
ओरछा शहर मध्य प्रदेश में निवारी जिले में बेतवा नदी के किनारे पर बसा हुआ है। इस नगर का निर्माण बुन्देल राजवंश के राजा रूद्र प्रताप सिंह द्वारा 16वीं शताब्दी में किया गया था। यह प्राचीन नगर चतुर्भुज मंदिर, ओरछा फोर्ट काम्प्लेक्स, राजा महल इत्यादि के लिए प्रसिद्ध है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 37 भारतीय धरोहर स्थल शामिल है। यदि ओरछा को भी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थानों की सूची में शामिल किया जाता है तो यह इस सूची में शामिल होने वाला 38वां स्थान होगा। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के तीन स्थान यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, यह धरोहर स्थल  हैं : साँची में बौद्ध स्मारक, भीमबेटका तथा खजुराहो।

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सरकार ने लिट्टे पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया

भारत सरकार ने लिबरेशन ऑफ़ टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) पर प्रतिबन्ध लगाने पर निर्णय लेने के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया है।

मुख्य बिंदु

  • हाल ही में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के सेक्शन 3 के सब-सेक्शन (1) तथा (3) के तहत तहत लिट्टे पर इस प्रतिबन्ध को पांच वर्ष तक बढ़ा दिया था।
  • मई, 2009 में लिट्टे की सैन्य हार के बाद भी यह संगठन भारत के विरुद्ध अपनी स्थिति को बरकरार रखे हुए है, यह भारतीय नागरिकों के लिए अभी भी एक बड़ा खतरा है।
  • लिट्टे ने अभी भी तमिल ईलम की संकल्पना को नहीं छोड़ा है और यह यूरोप में इसके लिए फण्ड एकत्रित कर रहा है।
  • लिट्टे को गैर-कानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण है अथवा नहीं, इसका निर्णय केंद्र द्वारा गठित ट्रिब्यूनल द्वारा किया जायेगा। इस ट्रिब्यूनल में दिल्ली उच्च न्यायालय की जस्टिस संगीता धींगरा सहगल शामिल हैं।
  • यह एक श्रीलंकाई उग्रवादी व राजनीतिक संगठन है, इसकी स्थापना 1976 में की गयी थी। इसका उद्देश्य श्रीलंका के पूर्व तथा उत्तर में स्वतंत्र तमिल ईलम देश का निर्माण करना है। 1991 में लिट्टे के सदस्यों द्वारा राजीव गाँधी की हत्या किये जाने के बाद भारत सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।

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