करेंट अफेयर्स - मई, 2019

ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का परीक्षण सु-30 MKI एयरक्राफ्ट से किया गया  

भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का परीक्षण Su-30 MKI एयरक्राफ्ट से दाग कर किया। यह परीक्षण सफल रहा, मिसाइल ने सटीकता से अपने लक्ष्य को भेदा।

इस परीक्षण के लिए एयरक्राफ्ट में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल तथा सॉफ्टवेयर परिवर्तन किये गये। इस कार्य के लिए भारतीय वायुसेना के इंजीनियर, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन, तथा ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड ने मिलकर कार्य किया।

ब्रह्मोस मिसाइल

ब्रह्मोस एक माध्यम रेंज की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, इसे पनडुब्बी, समुद्री जहाज़, लड़ाकू विमान व ज़मीन से दागा जा सकता है। ब्रह्मोस रूस की NPO और भारत के DRDO के बीच एक संयुक्त उपक्रम है। ब्रह्मोस मिसाइल 3 मैक (ध्वनि से तीन गुना तेज़) की गति से अपने लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती है। वर्तमान में इसकी गति को 5 मैक तक करने पर कार्य किया जा रहा है। यह मिसाइल रूसी मिसाइल पी-800 ओनिक्स पर आधारित है। इस मिसाइल का नाम भारत की नदी ब्रह्मपुत्र और रूस की नदी मोस्कवा के नाम को मिलाकर ‘ब्रह्मोस’ रखा गया है। वर्तमान में ब्रह्मोस मिसाइल के हाइपरसोनिक संस्करण को विकसित किया जा रहा है, यह हाइपरसोनिक संस्करण 7-8 मैक की गति से लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी। फिलहाल यह हाइपरसोनिक संस्करण लगभग 2020 में परीक्षण के लिए तैयार होगा।

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श्याम सरन को जापान के दूसरे सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार “आर्डर ऑफ़ द राइजिंग सन” से सम्मानित किया जाएगा

भारत के राजनयिक श्याम सरन को जापान के दूसरे सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार “ऑर्डर ऑफ़ द राइजिंग सन, गोल्ड एंड सिल्वर स्टार” से सम्मानित किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

उन्हें यह सम्मान 2019 स्प्रिंग इम्पीरियल डेकोरेशन्स के दौरान प्रदान किया जाएगा। उन्हें यह सम्मान भारत और जापान के बीच संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए प्रदान किया जा रहा है। श्याम सरन 2004-2006 के बीच भारत के विदेश सचिव थे। उनके कार्यकाल में पांच वर्षों में पहली बार तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी भारत की यात्रा पर आये थे। 1988 में जब जापान में “इंडिया फेस्टिवल” का आयोजन किया गया, तब श्याम सरन जापान में भारतीय दूतावास में डिप्टी चीफ थे। 2017 के बाद से श्याम सरन दोनों देशों के बीच आपसी समझ को मज़बूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने “इंडिया-जापान कोलोकियम” की मेजबानी भी की थी।

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