करेंट अफेयर्स - नवंबर, 2019

वैश्विक राजनयिक सूचकांक 2019

हाल ही में सिडनी बेस्ड लोवी इंस्टिट्यूट ने वैश्विक राजनयिक सूचकांक 2019 जारी किया। इस सूचकांक से ज्ञात होता है कि विश्व में राजनयिक/कूटनीतिक नेटवर्क का विस्तार या संकुचन किस प्रकार हो रहा है। इस सूचकांक में 61 देशों का मूल्यांकन किया गया है।

सूचकांक की विशेषताएं

विश्व में सबसे ज्यादा राजनयिक पोस्ट चीन की हैं। चीन ने अमेरिका को भी इस मामले में पछाड़ दिया है। विश्व भर में चीन की 276 से अधिक दूतावास हैं। इससे चीन के बढ़ते वर्चस्व तथा महत्वकांक्षा का अनुमान लगाया जा सकता है। 2016 में चीन इस सूचकांक में अमेरिका और फ्रांस के बाद तीसरे स्थान पर था।

अमेरिका सर्वाधिक देशों के दूतावास (एम्बेसी) तथा वाणिज्यिक दूतावास (कांसुलेट) हैं, अमेरिका में 342 राजनयिक पोस्ट हैं। इस मामले में चीन काफी पीछे दूसरे स्थान पर है, चीन में 256 पोस्ट हैं।

61 देशों की सूची में भारत को 12वां स्थान प्राप्त हुआ है। 2019 में भारत के 123 दूतावास व उच्चायुक्त तथा 54 वाणिज्यिक दूतावास हैं। 2017 में भारत की 120 दूतावास तथा 52 वाणिज्यिक दूतावास थे।

 

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कैबिनेट ने अनिवार्य जूट मैटेरियल पैकेजिंग के नियमों के विस्तार को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय कैबिनेट ने जूट पैकेजिंग मैटेरियल अधिनियम, 1987 के तहत आवश्यक नियमों को विस्तार देने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने 100% अनाज तथा 20% चीनी को विभिन्न जूट के बोरों में पैक किये जाने का निर्णय लिया है।

मुख्य बिंदु

इस निर्णय से जूट सेक्टर को काफी लाभ होगा और जूट उद्योग के विविधिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे जूट  की उत्पादकता व गुणवत्ता में भी सुधार होगा तथा जूट उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी। इससे मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा के किसानों को लाभ होगा।

जूट

कपास के बाद खेती तथा उपयोग की दृष्टि से जूट सबसे महत्वपूर्ण रेशा है, इसकी खेती जलवायु, ऋतू तथा मृदा पर निर्भर होती है। विश्व के कुल जूट उत्पादन का 85% गंगा डेल्टा क्षेत्र में उत्पादित किया जाता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा जूट उत्पादक देश है, भारत में विश्व के कुल 60% जूट का उत्पादन किया जाता है। जूट उत्पादन में भारत के बांग्लादेश और चीन का स्थान है। भारत के प्रमुख जूट उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा हैं।

भारत में जूट सेक्टर काफी हद तक सरकारी खरीद पर निर्भर है, सरकार प्रतिवर्ष लगभग 6500 करोड़ रुपये के जूट उत्पादों का क्रय करती है। देश भर में लगभग 40 लाख किसान आजीविका के लिए जूट पर निर्भर हैं। सरकार द्वारा जूट को बढ़ावा दिए जाने से इसकी मांग में वृद्धि होगी जिसका सीधा असर जूट किसानों की आर्थिक पर होगा।

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