करेंट अफेयर्स- अक्तूबर, 2018

ओडिशा तटीय आपदा चेतावनी प्रणाली : प्रमुख तथ्य

ओडिशा सरकार ने हाल ही में नागरिकों को चक्रवात, सुनामी तथा बाढ़ इत्यादि की चेतावनी के लिए एक प्रणाली को लांच किया है।

मुख्य बिंदु

  • यह “शीघ्र चेतावनी प्रसारण प्रणाली” क्षेत्र में भारत में इस प्रकार की पहली प्रणाली है।
  • इस चेतावनी प्रणाली को विश्व बैंक की सहायता से 82 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • आपातकालीन स्थिति में ध्वनि तथा साईरन के लिए ओडिशा की 480 किलोमीटर लम्बी तटरेखा के साथ 122 टावर लगाए गये हैं।
  • इस टावर से निकलने वाली चेतावनी ध्वनि 1.5 किलोमीटर के दायरे में सुनी जा सकती है।
  • आपातकालीन स्थिति में भुबनेश्वर में राज्य आपातकालीन केंद्र में बटन दबाया जाएगा।
  • इस सिस्टम के तहत बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, पुरी तथा गंजम को कवर किया गया है।
  • यह राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम निम्नीकरण परियोजना का हिस्सा है, इसकी सहायता से चक्रवातों से लोगों की रक्षा की जा सकेगी।
  • यह सिस्टम ओडिशा के मछुआरों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।

ओडिशा में आपदाएं

ओडिशा में कई आपदाएं जैसे चक्रवात, तूफ़ान तथा सुनामी इत्यादि का जोखिम है, ओडिशा का बहुत बड़ा भाग भूकंप जोखिम जोन-II में आता है। ओडिशा में 1999 में सुपर-साइक्लोन के कारण लगभग 10,000 लोगों की मृत्यु हुई थी। 2013 में ओडिशा के तट पर फाइलिन चक्रवात, 2014 में हुदहुद चक्रवात टकराया था। हाल ही में ओडिशा में “तितली” नामक चक्रवात आया था।

आपदा का सामना करने के लिए ओडिशा की तैयारी

  1. ओडिशा में 1999 में ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना की गयी थी, यह भारत में स्थापित किया गया पहला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद्र था।
  2. ओडिशा में एक सक्रीय राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण है।
  3. चक्रवात से पीड़ित क्षेत्रों में ओडिशा ने 800 से अधिक बहुउद्देशीय आश्रय स्थलों का निर्माण करवाया है।
  4. ओडिशा से सभी जोखिमग्रस्त क्षेत्रों में सक्रीय चक्रवात प्रबंधन केंद्र हैं।
  5. ओडिशा आपदा त्वरित अनुक्रिया बल (ODRAF) निरंतर आपदा से निपटने के लिए कौशल लोगों तथा अधोसंरचना के विकास पर कार्य कर रहा है। आपदा का सामना करने के लिए ओडिशा की तैयारी काफी पुख्ता है।

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फेक न्यूज़ से निपटने के लिए अमेरिकी अनुसंधानकर्ताओं ने वेब बेस्ड टूल का निर्माण किया

अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल प्लेटफार्म पर फेक न्यूज़ (असत्य समाचार) को मॉनिटर करने के लिए वेब बेस्ड टूल का विकास किया है। यह टूल इफ्फी कोशेंट नामक प्लेटफार्म हेल्थ मीट्रिक का उपयोग करता है, यह कोशेंट दो बाहरी इकाइयों न्यूज़व्हिप तथा मीडिया बायस/फैक्ट चेकर से डाटा प्राप्त करता है।

टूल की कार्यप्रणाली

न्यूज़व्हिप लाखों वेबसाइट्स से यूआरएल प्राप्त करता है तथा फेसबुक व ट्विटर पर इन साइट्स के इंगेजमेंट से जुड़ी जानकारी प्राप्त करता है।

इफ्फी कोशेंट न्यूज़व्हिप से टॉप 5000 लोकप्रिय यूआरएल की जानकारी प्राप्त करेगा।

तत्पश्चात यह टूल मीडिया बायस/फैक्ट चेकर से जानकारी प्राप्त करेगा पता लगाएगा की यूआरएल “इफ्फी, ओके अथवा अज्ञात” किस्म का है।

न्यूज़व्हिप

न्यूज़व्हिप एक सोशल मीडिया इंगेजमेंट ट्रैकिंग फर्म है, यह रोजाना लाखों वेबसाइट्स से डाटा एकत्रित करती है। यह किसी वेबसाइट के फेसबुक तथा ट्विटर से सम्बंधित डाटा की जानकारी भी जुटाती है।

मीडिया बायस/फैक्ट चेकर

यह यूआरएल को तीन श्रेणियों में बांटता है – इफ्फी, ओके और अज्ञात। यदि वेबसाइट का स्त्रोत संदिग्ध है तो वेबसाइट को “इफ्फी” में डाला जाता है। यदि वेबसाइट में पक्षपातपूर्ण अथवा व्यंग्य इत्यादि है तो इसे “ओके” श्रेणी में रखा जाता है, यदि वेबसाइट इनमे से किसी भी श्रेणी में नहीं आती तो इसे “अज्ञात” श्रेणी में डाला जाता है।

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