करेंट अफेयर्स – सितंबर, 2018

28 सितम्बर : विश्व रेबीज दिवस

28 सितम्बर को विश्व भर में विश्व रेबीज दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य रेबीज बिमारी तथा इसकी रोकथाम के बारे जागरूकता फैलाना है। विश्व रेबीज दिवस 2018 की थीम “रेबीज : सन्देश साझा करें, एक जीवन बचाएं” है। इस दिवस का उद्देश्य जानवरों व इन्सानों पर रेबीज के प्रभाव तथा रेबीज के रोकने के तरीकों के बारे में जागरूकता फैलाना है।

पृष्ठभूमि

विश्व रेबीज दिवस ग्लोबल अलायन्स फॉर रेबीज कण्ट्रोल की पहल है, इसकी शुरुआत 2007 में रेबीज की रोकथाम पर जागरूकता फैलाने के की गयी थी। 28 सितम्बर को प्रतिवर्ष विश्व रेबीज दिवस के रूप में मनाया जाता है, रेबीज दिवस फ़्रांसिसी केमिस्ट व माइक्रोबायोलॉजिस्ट लुइस पाश्चर की मृत्यु वर्षगाँठ पर मनाया जाता है। लुइस पाश्चर ने अपने सहकर्मियों के साथ  मिलकर रेबीज के लिए पहले टीके का आविष्कार किया था।

रेबीज

रेबीज एक वायरल बिमारी है, इसके कारण गर्म रक्त वाले जीवों के मस्तिष्क के सूजन (एक्यूट इन्सेफेलाइटिस) होती है। यह एक जूनोटिक बिमारी है अर्थात यह एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में फैलती है, यह आमतौर पर कुत्तों के काटने अथवा संक्रमित जानवरों से खरोंच लगने के कारण होता है। रेबीज वायरस केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे मस्तिष्क में रोग उत्पन्न होता है और अंत में रोगी की मृत्यु होती है। घरेलु कुत्ता रेबीज वायरस का प्रमुख स्त्रोत होता है। रेबीज के कारण होने  वाली 95% मौतें कुत्तों के कारण होती हैं। रेबीज के प्रमुख लक्षण रौशनी व पानी से डर है। पालतू जानवरों को टीके लगाने से रेबीज को नियंत्रित किया जा सकता है।

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GST परिषद् ने केरल की आपदा सेस की मांग के लिए किया मंत्री समूह का गठन

GST परिषद् ने केरल की आपदा सेस की मांग के लिए किया मंत्री समूह का गठन  किया है, यह मंत्री समूह बाढ़ पुनर्वास के लिए केरल की सेस की मांग पर विचार करेगा। इसका निर्णय नई दिल्ली में GST परिषद् की 30वीं बैठक में लिया गया। मंत्री समूह ने केरल के आपदा कर लगाने के प्रस्ताव पर चर्ची की। इस विशेष कर का उद्देश्य केरल में बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण के कार्य की वित्तीय आवश्यकता को पूरा करना है।

पृष्ठभूमि

अगस्त, 2018 में केरल में असामान्य उच्च मानसून के कारण भीषण बाढ़ का सामना करना है। यह 1924 के बाद केरल में सबसे अधिक भयानक बाढ़ थी। इस बाढ़ से केरल की 1/6  जनसँख्या प्रभावित हुई थी। केरल के सभी 14 जिलों को रेड अलर्ट पर रखा गया था। केंद्र सरकार ने इस बाढ़ को गंभीर आपदा अथवा लेवल 3 की आपदा घोषित किया था। इस बाढ़ के कारण 26 वर्षों में पहली बार इडुक्की बाँध के सभी 5 गेट खोले गये थे। भारी वर्षा के कारण 54 में से 35 बाँध पहली बार खोले गये। इस बाढ़ के कारण केरल के वायनाड तथा इडुक्की जिलों में काफी भूस्खलन ही घटनाएँ हुई।

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