करेंट अफेयर्स – सितंबर, 2018

राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल शुरू करेगा 4 और  बटालियन

राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (National Disaster Response Force) शीघ्र ही चार अतिरिक्त बटालियन शुरू करने जा रहा है। यह चार बटालियन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में नियुक्त की जाएँगी। इन बटालियन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले तैयार किया जायेगा। इन बटालियन में आपदा के दौरान महिलाओं की सहायता के लिए एक विशेष महिला दल होगा।

मुख्य बिंदु

NDRF ने अपनी सभी बटालियन में 250 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कोष की व्यवस्था की हैइस रिज़र्व में सभी आवश्यक वस्तुएं जैसे रेडीमेड भोजन तथा दवाएं होंगी, इन्हें आपदा के दौरान पीड़ितों में वितरित किया जायेगा।

NDRF की चार अतिरिक्त बटालियन शुरू करने के प्रमुख उद्देश्य आपदा के दौरान शीघ्र कार्यवाई शुरू करना है। शुरू में दो बटालियन को इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस, एक बटालियन को असम राइफल्स तथा एक बटालियन को बॉर्डर सिक्यूरिटी फ़ोर्स के रूप में शुरू किया जायेगा। बाद में इन चार बटालियन को NDRF बटालियन में बदला जायेगा।

राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF)

NDRF आपदा के समय त्वरित क्रिया करने वाला बल है, इसकी स्थापना वर्ष 2006 में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत की गयी थी। NDRF का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। NDRF के लिए नीति, योजना तथा दिशेनिर्देश का निर्माण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किया जाता है।

NDRF प्राकृतिक आपदा, मानव निर्मित आपदा, दुर्घटना अथवा आपातकाल के दौरान राहत व बचाव कार्य करता है। इस दौरान जान-माल की रक्षा के लिए NDRF स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करता है। वर्तमान में NDRF के 12 बटालियन देश के अलग-अलग हिस्सों में नियुक्त की गयी हैं।

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नौसेना ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 2 डाइविंग सपोर्ट वेसल के निर्माण के लिए किया अनुबंध

भारतीय नौसेना ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 2 डाइविंग सपोर्ट वेसेल के निर्माण के लिए अनुबंध किया है। इससे पनडुब्बी व तट पर भारतीय नौसेना के कार्यशीलता में वृद्धि होगी।

मुख्य बिंदु

पहले डाइविंग सपोर्ट वेसल का निर्माण 36 महीने के दौरान किया जायेगा, इसके 6 महीने बाद दूसरे वेसल का निर्माण किया जायेगा। इस वेसल को विशाखापत्तनम और मुंबई में तैनात किया जायेगा। इनकी लम्बाई 118 मीटर होगी तथा इनकी जल विस्थापन क्षमता 7,650 टन होगी। इन वेसल में डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल का उपयोग किया जाएगा, इससे राहत व बचाव कार्यों में कुशलता में वृद्धि होगी। यह वेसल 650 मीटर की गहराई में पनडुब्बी बचाव कार्य कर सकते हैं।

आवश्यकता

भारतीय नौसेना हिन्द महासागर क्षेत्र भारत की जल सीमा की सुरक्षा करने के अलावा में पनडुब्बी बचाव, परीक्षण, जलमग्न निरीक्षण तथा सागर में एयरक्राफ्ट व समुद्री जहाज़ के अवशेष की रिकवरी इत्यादि का कार्य भी करती है। इस सभी कार्यों के लिय गोताखोर ऑपरेशन की ज़रूरत होती है और इसके लिए गोताखोरों को लम्बे समय तक पानी के अन्दर रहना पड़ता है। इस कार्य के लिए गोतोखोरों के लांच, रिकवरी तथा उपकरणों को ले जाने के लिए उपयुक्त  प्लेटफार्म की आवश्यकता पड़ती है। इस कार्य डाइविंग सपोर्ट वेसल काफी उपयोगी सिद्ध होंगे।

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