करेंट अफेयर्स – सितंबर, 2018

केंद्र सरकार ने लोकपाल के लिए किया 8 सदस्यीय खोज समिति का गठन

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय खोज समिति का गठन किया। यह समिति लोकपल अध्यक्ष तथा सदस्यों के लिए नाम सुझाएगी। लोकपाल व लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत लोकपाल के लिए चयन प्रक्रिया जारी है।

लोकपाल खोज समिति के सदस्य

जस्टिस सखा राम सिंह यादव, पूर्व SBI चेयरपर्सन अरुंधती भट्टाचार्य, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर रंजित कुमार, पूर्व गुजरात पुलिस प्रमुख ललित के. पंवर, इलाहबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शब्बीरहुसैन एस. खांडवावाला, प्रसार भारती के चेयरपर्सन ए. सूर्य प्रकाश तथा इसरो के पूर्व प्रमुख ए. एस.किरण कुमार।

यह खोज समिति शीघ्र ही अपना कार्य शुरू करेगी। यह समिति लोकपाल के चेयरपर्सन तथा सदस्यों लिए नामों का सुझाव देगी।

लोकपाल व लोकायुक्त अधिनियम, 2013

इस अधिनियम को 2013 में पारित किया गया था, इसका उद्देश्य सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच पड़ताल के लिए वैधानिक निकाय की स्थापना करना है। इस अधिनियम के अंतर्गत लोकपाल की नियुक्त एक उच्च स्तरीय चयन समिति द्वारा की जाती है, इस चयन समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोक सभा स्पीकर, विपक्षी दल के नेता तथा एक प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल हैं।

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सदन के विघटन के बाद ही लागू हो जाती है आचार संहिता : चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने हाल ही में घोषणा की कि राज्यों में समय से पूर्व विधानसभा के विघटन होने के तुरंत बाद ही आचार संहिता लागू हो जाती है। इसके अतिरिक्त चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि विघटन के बाद कार्यकारी सरकार अथवा केंद्र सरकार राज्य में नए चुनाव होने तक नयी योजना की घोषणा नहीं कर सकती।

आदर्श आचार संहिता

आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा निर्मित निशानिर्देशों का समूह है, इसका उद्देश्य राजनीतिक दलों तथा उनके उम्मीदवारों की गतिविधियों का नियमन करना है। इसके द्वारा मुक्त व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किये जाते हैं। आचार संहिता का कोई संवैधानिक आधार नहीं है न ही इसे कानून द्वारा लागू किया जा सकता है। परन्तु इसकी वैधता निर्विवाद है और सभी राजनीतिक दल इसका पालन करते हैं। पहली भार 1971 में लोक सभा चुनावों से पूर्व आदर्श आचार संहिता लागू की गयी थी। तत्पश्चात सभी केन्द्रीय तथा राज्यों चुनावों में आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है।

आदर्श आचार संहिता का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सत्ता पक्ष अपनी शक्तियों का उपयोग करके चुनावों को अपने पक्ष में करने का प्रयास न करे। इसके द्वारा राजनीतिक दलों के बीच विभेद को रोका जाता है तथा सभी उम्मीदवारों को प्रतिस्पर्धा के लिए समान परिस्थितियां उपलब्ध करवाई जाती हैं। यह आचार संहिता सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, पोलिंग एजेंटों, सत्ता पक्ष तथा सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होती है।

आदर्श आचार संहिता के लागू होने की तिथि

आचार संहिता के सम्बन्ध में चुनाव आयोग तथा सरकार के बीच काफी विवाद रहे हैं। आदर्श आचार संहिता चुनाव तिथि की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है। इसका निश्चय 16 अप्रैल, 2001 में केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के बीच हुए समझौते के द्वारा किया गया था। इस समझौते के द्वारा चुनाव आयोग पर भी बंदिश है कि आचार संहिता की घोषणा मतदान के तीन सप्ताह से अधिक समय से पहले नहीं की जा सकती। इस समझौते में निश्चित किया गया था कि आचार संहिता के दौरान किसी भी परियोजना का उद्घाटन सिविल सर्वेंट द्वारा ही किया जायेगा।

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