करेंट अफेयर्स – सितंबर, 2018

सरकार ने यौन अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस लांच किया

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (NDSO) को लांच किया। इसके साथ ही भारत विश्व का नौवां देश बन गया है जिसने इस प्रकार का डेटाबेस तैयार किया है। यह डेटाबेस आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं होगा, यह केवल कानूनी एजेंसियों के लिए अपराधों की छानबीन के लये उपलब्ध करवाया जायेगा।

राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (National Database on Sexual Offenders)

 यह डेटाबेस राष्ट्रीय महिला सुरक्षा अभियान के तहत शुरू किया गया है, इसका उद्देश्य महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराधों में लगाम लगाना है। इस डाटा में बलात्कार, छेड़खानी तथा पोक्सो एक्ट के तहत दोषी पाए गए अपराधियों को शामिल किया जाएगा। इस डाटाबेस में यौन अपराधियों के नाम, पता, फोटोग्राफ, फिंगरप्रिंट, डीएनए सैंपल, आधार नंबर तथा पैन नंबर होंगे। वर्तमान में इस डेटाबेस में 4.4 लाख प्रविष्ठियां हैं। इस डाटाबेस में 2005 के बाद के डाटा को नियमित रूप से अपडेट किया जायेगा। इस डेटाबेस में कम गंभीर श्रेणी के अपराधियों के रिकॉर्ड को 15 वर्षों तक स्टोर किया जायेगा, जबकि मध्यम श्रेणी के अपराधियों के रिकॉर्ड को 25 वर्षों तक स्टोर किया जायेगा। इस डेटाबेस में सजायाफ्ता तथा आदतन अपराधियों के रिकॉर्ड को स्थायी रूप से स्टोर किया जायेगा।

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साईक्लोन-30 : भारत की सबसे बड़ी साइक्लोट्रोन फैसिलिटी हुई कार्यशील

भारत की सबसे बड़ी साइक्लोट्रोन फैसिलिटी कलकत्ता बेस्ड वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रोन सेंटर में शुरू हुई। यह केंद्र परमाणु उर्जा विभाग के अधीन कार्य करता है। साइक्लोट्रोन का उपयोग कैंसर के निदान व उपचार के लिए रेडियो आइसोटोप के निर्माण के लिए किया जाता है। इस आइसोटोप से रेडिएशन द्वारा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

साईक्लोन-30

इस साइक्लोट्रोन द्वारा रेडियोआइसोटोप का उत्पादन किया जायेगा, यह रेडियोआइसोटोप कैंसर के निदान व उपचार के लिए आवश्यक है। यह देश की एकमात्र ऐसी फैसिलिटी है जहाँ पर जर्मेनियम 68 रेडियोआइसोटोप का उत्पादन किया जायेगा, इसका उपयोग ब्रैस्ट कैंसर के निदान के लिए किया जाता है। इस साइक्लोट्रोन में पैलेडियम 103 का उत्पादन भी किया जायेगा, इसका उपयोग प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में किया जाता है। भविष्य में इस फैसिलिटी में आयोडीन 123 आइसोटोप का उत्पादन भी किया जायेगा, इसका द्वारा थाइरोइड कैंसर का निदान किया जा सकता है।

महत्व

इस साइक्लोट्रोन की सहायता से सस्ती दरों पर रेडियोआइसोटोप उपलब्ध हो पाएंगे तथा इसके आयात में भी कमी आएगी। भविष्य में भारत से रेडियोआइसोटोप निर्यात किये जा सकते हैं। भारत जर्मेनियम 68 और गैलियम 68 का निर्णय कर सकता है। इसका उपयोग मटेरिअल साइंस और न्यूक्लियर फिजिक्स में अनुसन्धान के लिए किया जा सकता है।

पृष्ठभूमि

लांसेट ग्लोबल हेल्थ के अध्ययन के अनुसार भारत में 2016 में 8.3 मौतें कैंसर के कारण हुई थी। 1990 में 5.48 लाख के मुकाबले कैंसर के मामले 2016 में 1.1 मिलियन तक पहुँच गये हैं। वर्तमान में कैंसर के उपचार के लिए रेडियो आइसोटोप का आयात करना पड़ता है, जबकि कुछ एक रेडियो आइसोटोप का उत्पादन अप्सरा परमाणु अनुसन्धान केंद्र में किया जाता है। देश में अधिकतर साइक्लोट्रोन फैसिलिटी निजी अस्पतालों में हैं, जिस कारण कैंसर का इलाज काफी महंगा हो जाता है।

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