करेंट अफेयर्स – सितंबर, 2019

वायुसेना में शामिल किये जायेंगे 8 अपाचे हेलिकॉप्टर

भारतीय वायुसेना में अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग द्वारा निर्मित आठ अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल किये जायेंगे। इसके लिए पठानकोट एयरबेस में एक समारोह का आयोजन किया जायेगा, इस समारोह में एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोआ मुख्य अतिथि होंगे।

यह हेलिकॉप्टर विश्व का सबसे घातक अटैक हेलिकॉप्टर माना जाता है। इस हेलिकॉप्टर का पहला बैच 27 जुलाई को गाज़ियाबाद के हिंडन एयरबेस पर पहुंचा। इस पहले बैच में चार AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर शामिल थे।

मुख्य बिंदु

मार्च, 2020 तक भारतीय वायुसेना में 22 अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल हो जायेंगे, इसके लिए भारत ने सितम्बर, 2015 में अमेरिका के साथ 13,952 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किये थे।

गौरतलब है कि इन हेलिकॉप्टर को ऑपरेट करने के लिए भारतीय वायुसेना के चयनित रेव ने अमेरिका के अलबामा में अमेरिकी सेना के बेस में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। भारतीय वायुसेना में अपाचे हेलिकॉप्टर को शामिल करना इसके हेलिकॉप्टर के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

AH-64E अपाचे हेलिकॉप्टर एक मल्टी-रोल अटैक हेलिकॉप्टर है, इसका उपयोग अमेरिकी सेना द्वारा किया जाता है। इस हेलीकाप्टर में हवा से हवा में मार कर सकने वाली स्टिंगर मिसाइल, हेलफायर लॉन्गबो एयर-टू-ग्राउंड मिशन, गन तथा राकेट उपयोग किये जा सकते हैं।

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समुद्रयान प्रोजेक्ट : NIOT गहरे सागर में खोज के लिए लांच करेगा मिशन

राष्ट्रीय महासागर तकनीक संस्थान (NIOT) 2021-22 तक “समुद्रयान प्रोजेक्ट” को लांच करेगा, इस मिशन के तहत गहरे महासगर में खोज कार्य किया जाएगा। ये केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का पायलट प्रोजेक्ट है,  गहरे महासागर में खोज कार्य के लिए 6000 करोड़ रुपये व्यय करने की योजना बनायी गयी है।

समुद्रयान प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट के तहत एक स्वदेशी निर्मित जलमग्न वाहन का विकास किया जायेगा, इस जलमग्न वाहन में तीन लोग समुद्र में 6000 मीटर की गहराई तक शोधकार्य करने जायेंगे। यह कार्य राष्ट्रीय महासागर तकनीक संस्थान (NIOT), चेन्नई द्वारा किया जाएगा। गौरतलब है कि समुद्रयान प्रोजेक्ट इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट की तर्ज पर शुरू किया गया है। इस परियोजना पर 200 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।

यदि यह मिशन सफल रहता है तो भारत उन चुनिन्दा विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हो जायेगा जो गहरे सागर में खनिजों की खोज का कार्य करते हैं। अब तक केवल विकसित देशों ने ही यह कार्य किया है, भारत इस कार्य को करने वाला विश्व का पहला विकासशील देश बन सकता है।

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