करेंट अफेयर्स – सितंबर, 2019

चंद्रयान-2 अपडेट : लैंडर ‘विक्रम’ चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग हुआ

आज 2 सितम्बर, 2019 को चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ ऑर्बिटर से अलग हो गया है। ऑर्बिटर से लैंडर को अलग करने की प्रक्रिया 13:15 पर शुरू हुई थी। अब इसके बाद लैंडर को चन्द्रमा के दक्षिणी क्षेत्र में उतारने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चंद्रयान-2 का लैंडर “विक्रम” 7 सितम्बर को चन्द्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

चंद्रयान -2 के लैंडर का नाम “विक्रम” रखा गया है, जबकि इसके रोवर का नाम “प्रज्ञान” रखा गया है।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जायेगा।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर क्रेश हो गया था।

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लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवाने को भारतीय सेना का उप-प्रमुख किसे नियुक्त किया गया 

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने भारतीय सेना के उप-प्रमुख का कार्यभार संभाल लिया  है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अंबु का स्थान लिया, वे 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हुए। 37 वर्ष के सेवाकाल में लेफ्टिनेंट जनरल नरवाने ने विभिन्न कमांड में कार्य किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन में भी कार्य किया है।

भारतीय थल सेना

ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार के अंतर्गत सैन्य विभाग में 1776 में भारतीय थल सेना की शुरुआत हुई है। भारतीय सेना का आदर्श वाक्य “स्वपूर्व सेवा” है। भारतीय थल सेना बाहरी तथा अन्तरिक्ष खतरों से देश की रक्षा करती है तथा देश की सीमाओं को सुरक्षित रखते हुए देश में शांति सुनिश्चित करती है। भारतीय थल सेना में 12 लाख से अधिक सक्रीय सैनिक कार्यरत्त हैं।

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