करेंट अफेयर्स एवं हिन्दी समाचार सारांश

नाबार्ड सर्वेक्षण 2017-17 : ग्रामीण आय का केवल 23% हिस्सा कृषि से प्राप्त होता है

नाबार्ड बैंक के अखिल भारतीय वित्तीय समावेश सर्वेक्षण 2016-17 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कुल आय का केवल 23% हिस्सा ही कृषि से प्राप्त होता है। कृषि परिवारों की आय का 43% हिस्सा खेती व पशुपालन से प्राप्त होता है।

सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु

भारत में लगभग 21.17 करोड़ ग्रामीण परिवार है। ग्रामीण शब्द का दायरा काफी विस्तृत है, इसमें राजस्व गावों तथा 50,000 से कम जनसँख्या वाले अर्ध-शहरी केन्द्रों को शामिल किया गया है। 21.17 करोड़ परिवारों में से 10.07 करोड़ परिवार कृषि से सम्बंधित हैं। प्रत्येक परिवार में से कम से कम एक व्यक्ति कृषि कार्य में कार्यरत्त है जो वर्ष में औसतन 5000 रुपये के मूल्य के कृषि पदार्थों का उत्पादन करता है। शेष 11.10 करोड़ परिवार गैर-कृषि परिवार हैं।

देश में ग्रामीण परिवार की औसत शुद्ध वार्षिक आय लगभग 8,059 रूपए है। इसमें अधिकतर आय (3,504 रुपये) मजदूरी से प्राप्त होती है। जबकि सरकारी व निजी क्षेत्र में नौकरी से 1906, कृषि से 1832 रुपये औसतन प्राप्त होते हैं। इस सर्वेक्षण के अनुसार 21वीं शताब्दी में भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कम की जाती है।

Categories:

Month:

Tags: , ,

ब्रू लोगों के मिजोरम में पुनर्वास के लिए गृह मंत्रालय संधि की शर्तों में देगा ढील

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने ब्रू प्रवासियों के त्रिपुरा से मिजोरम में पुनर्वास के लिय की गयी संधि में ढील देने को स्वीकृति प्रदान की है। इस संधि पर भारत सरकार, त्रिपुरा सरकार, मिजोरम सरकार तथा मिजोरम की ब्रू विस्थापित फोरम ने जुलाई, 2018 में हस्ताक्षर किये थे।

समझौते में किये गए प्रावधान

इस समझौते में 5,407 ब्रू परिवारों (32,876  लोग) को शामिल किया गया है, यह त्रिपुरा में स्थायी शिविरों में रह रहे हैं। इस संधि के तहत इन ब्रू परिवारों को 30 सितम्बर, 2018 से पहले मिजोरम में वापस भेजा जाना है। इस पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाएगी तथा उनकी सुरक्षा, शिक्षा तथा आजीविका की समस्या का समाधान भी करेगी। इस ब्रू परिवारों को 4-4 लाख रुपये दिए जायेंगे, यह राशी परिवार के मुखिया के खाते में फिक्स्ड डिपाजिट की जाएगी। तीन वर्षों तक निरंतर मिजोरम में रहने के बाद ही उन्हें रोकड़ सहायता दी जाएगी। इस परिवारों के घर के निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये तीन किश्तों में दिए जायेंगे। इसके अलावा इन परिवारों को दो वर्ष निशुल्क राशन दिया जायेगा तथा प्रतिमाह 5000 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। इन ब्रू लोगों के आधार कार्ड तथा राशन कार्ड इत्यादि दस्तावेज त्रिपुरा सरकार द्वारा जारी किये जायेंगे। इन लोगों की सुरक्षा का उत्तरदायित्व मिजोरम सरकार पर होगा।

समझौते में छूट

इस समझौते में कुछ एक शर्तों पर त्रिपुरा में ब्रू समुदाय के लोगों ने विरोध किया था। 4 लाख की रोकड़ सहायता के लिए मिज़ोरम में निरंतर रहने की सीमा को तीन वर्ष से कम करके दो वर्ष किया जायेगा। वे 4 लाख की वित्तीय सहायता के 90% हिस्से को ऋण के रूप में बैंक से निकाल सकते हैं। पुनर्वास के दौरान एक गाँव में कम से कम 50 लोगों को स्थानांतरित किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

बरु (रियांग) जनजाति उत्तर-पूर्व के कुछ राज्य में निवास करती है। मिजोरम में यह जनजाति मामित और कोलासिब जिले में केन्द्रित है। 1997 में मिज़ो और ब्रू जनजातियों के बीच हिंसा के कारण ब्रू जनजाति के लोगों को मिजोरम छोड़कर त्रिपुरा में बसना पड़ा था। मिज़ो छात्र संघ द्वारा ब्रू लोगो को मतदाता सूची से हटाने की मांग कर रहा था, उनका मत था कि ब्रू मिजोरम के मूल निवासी नहीं हैं। इस हिंसा के बाद एक सशस्त्र ब्रू संगठन ‘ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ की स्थापना हुई थी। इसके अलावा एक राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल फ्रंट की स्थापना की गयी थी। त्रिपुरा से मिजोरम में ब्रू के पुनर्वास का पहला चरण नवम्बर, 2010 में शुरू हुआ था, जब 1,622 परिवारों के 8,573 को मिजोरम में बसाया गया था।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

Advertisement