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नेशनल बायोफार्मा मिशन: सरकारी ने बायोफर्मास्यूटिकल्स के शुरुआती विकास की दिशा में अनुसंधान हेतु विश्व बैंक के साथ समझौता किया

नेशनल बायोफार्मा मिशन के तहत बायोफर्मास्यूटिकल्स के शुरुआती विकास की दिशा में अनुसंधान को तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने आसान वित्तपोषण व्यवस्था के लिए विश्व बैंक के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए है।
विश्व बैंक की ओर से परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी), जैव प्रौद्योगिकी विभाग, वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक मामलों के विभाग, तथा अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए ।

नेशनल बायोफार्मा मिशन

यह 2017 में विश्व बैंक के ऋण के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 50% वित्त पोषण के साथ पांच साल के लिए 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल लागत पर शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं का मुकाबला करने के लिए टीकों, जैविक विज्ञान और चिकित्सा उपकरणों, जैव चिकित्सा उत्पादों के डिजाइन और विकास के लिए भारत को केंद्र बनाना है। अकादमिक शोधकर्ताओं की क्षमता को मजबूत करना, उत्पाद विकास के प्रारंभिक चरणों के दौरान लागत और जोखिम को कम करके जैव उद्यमियों और एसएमई को सशक्त बनाना तथा उद्योग के नवाचार को बढावा देना इसका उद्देश्य है।

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भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री: बासमती उत्पादक क्षेत्र हेतु मध्य प्रदेश का दावा ख़ारिज

मध्य प्रदेश के खुद को पारंपरिक बासमती उत्पादक क्षेत्र में शामिल किये जाने संबंधी दावे को भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री ने खारिज कर दिया है भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री के अनुसार बासमती के लिये जीआई टैग गंगा के मैदानी क्षेत्र वाले खास हिस्से हेतु प्रदान किया गया है और मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में नहीं आता है। अतः उसे जीआई टैग नहीं दिया जा सकता। पूसा बासमती-1 किस्म का 50 प्रतिशत उत्पादन क्षेत्र मध्य प्रदेश के अंतर्गत आता है। मध्य प्रदेश सरकार ने मांग की थी कि इसके 13 ज़िलों – विदिशा, रायसेन, मोरेना, भिंड, श्योपुर, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, सेहोर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर को बासमती धान के लिये जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तरह भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग दिया जाए, लेकिन इस दावे को भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री ने खारिज कर दिया है ।

भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग

यह किसी उत्पाद की उत्पत्ति अथवा किसी विशेष क्षेत्र द्वारा उसकी उत्पत्ति को दर्शाता है भौगोलिक संकेत टैग प्रदान करना किसी विशिष्ट उत्पाद के उत्पादक को संरक्षण प्रदान करता है जो कि उनके मूल्यों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में निर्धारित करने में सहायता करता है। बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं में भौगोलिक संकेत को शामिल किया जाता है।

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