करेंट अफेयर्स एवं हिन्दी समाचार सारांश

तकनीकी खराबी के चलते सोयुज़ राकेट की आपातकालीन लैंडिंग

कजाखस्तान में झेजकज्गान के निकट सोयुज़ राकेट की आपातकालीन लैंडिंग की गयी, यह राकेट अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुआ था, इस राकेट में अमेरिकी अंतरिक्षयात्री निक हेग तथा रूसी अंतरिक्षयात्री अलेक्सी ओवचिनिन सवार थे। राकेट के उड़ान के बूस्टर राकेट क्रियाशील नहीं हो सके।

मुख्य बिंदु

इस उड़ान के लिए सोयुज़-MS 10 राकेट का उपयोग किया गया। उड़ान के 90 सेकंड बाद ही उड़ान में कुछ अनियमितता पाई गयी, जिस कारण इस राकेट की आपातकालीन लैंडिंग करवानी पड़ी। इस घटना में अमेरिकी अंतरिक्षयात्री निक हेग तथा रूसी अंतरिक्षयात्री अलेक्सी ओवचिनिन दोनों सुरक्षित बच गये। यह दोनों अन्तरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर एक्सपीडिशन 57 क्रू में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इस घटना के बाद राहत व बचाव दल को सोयुज़ का मलबा बैकोनुर से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर-पूर्व में मिला।

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IND-INDO CORPAT: भारत और इंडोनेशिया के बीच समन्वयित गश्त का आयोजन इंडोनेशिया में किया जा रहा है

भारत और इंडोनेशिया के बीच समन्वयित गश्त का आयोजन इंडोनेशिया में किया जा रहा है। इसका आयोजना इंडोनेशिया के बेलवन में 11-27 अक्टूबर, 2018 के बीच किया जा रहा है। इस संयुक्त गश्त में दोनों देशों के पोत तथा एयरक्राफ्ट हिस्सा ले रहे हैं, दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा के 236 नॉटिकल मील के क्षेत्र में गश्त करेंगे।

IND-INDO CORPAT 2018

इस गश्त का आयोजन तीन चरणों में किया जायेगा, इसका समापन अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में एक समारोह में किया जायेगा। इस गश्त में आईएनएस कुलिश तथा डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान अंदमान व निकोबार कमांड से हिस्सा ले रहे हैं। इससे इंडोनेशिया के साथ भारतीय नौसेना तथा इन्डोनेशियाई नौसेना के बीच संबंधों में मजबूती आएगी। इस गश्त का उद्देश्य मित्र देशों के साथ भारत की शांतिप्रिय उपस्थिति तथा एकजुटता को व्यक्त करना है।

पृष्ठभूमि

दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी के तहत भारतीय तथा इन्डोनेशियाई नौसेनाएं 2002 से वर्ष में दो बार समन्वयित गश्त का अभ्यास करती हैं। इस गश्ती अभ्यास का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा के निकट किया जाता है, इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र को वाणिज्यिक शिपिंग तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना है। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ भी बेहतर होती है। यह गश्ती अभ्यास केंद्र सरकार के सागर (सिक्यूरिटी एंड ग्रोथ फॉर आल इन द रीजन) तथा एक्ट ईस्ट पालिसी का हिस्सा है।

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