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रूस से साथ की गयी इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि से अमेरिका अलग हुआ

रूस ने हाल ही अमेरिका द्वारा इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि से पीछे हटने की पुष्टि की। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी  कि अमेरिका, रूस के साथ की गयी तीन दशक पुरानी इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि से अलग होगा, इस संधि पर शीत युद्ध के दौरान हस्ताक्षर किये गये थे।

इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) संधि

यह शीतकाल की एक महत्वपूर्ण संधि थी, इस संधि के द्वारा 500-5000 किलोमीटर की भूमि से लांच की जाने वाली परमाणु मिसाइलों के निर्माण व परीक्षण पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। इस संधि पर दिसम्बर, 1987 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन तथा उनके सोवियत संघ के समकक्ष मिखाइल गोर्बाचेव ने हस्ताक्षर किये थे।

इस संधि के द्वारा सभी परमाणु तथा पारंपरिक मिसाइलों (जिनकी रेंज 500-1000 किलोमीटर तथा 1000 से 5,500 किलोमीटर है) , उनके लांचर पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। इस संधि के द्वारा दो महाशक्तियों के बीच हथियारों के विकास की दौड़ पर रोक लगी तथा यूरोप में अमेरिका के नाटो सहयोगियों का रूसी आक्रमण से बचाव भी हुआ। इस संधि का निर्माण यूरोप में स्थायित्व लाने के लिए किया गया था।

संधि से पीछे हटने के कारण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया है कि रूस ने इस संधि का उल्लंघन करता है और पहले भी कई बार उल्लंघन कर चुका है। यह आरोप रूस की कथित नोवातोर 9M729 मिसाइल (SSC-8) के विकास व तैनाती की ख़बरों के बाद लगाया गया है, यह मिसाइल यूरोप पर बहुत कम समय में हमला कर सकती है। बराक ओबामा ने भी अपने कार्यकाल में 2014 में यह मुद्दा उठाया था। परन्तु रूस ने इन आरोपों को ख़ारिज किया तथा अमेरिका पर यूरोप में मिसाइल सिस्टम स्थापित करने का आरोप लगाया।

परिणाम

अमेरिका द्वारा संधि से बाहर के बाद अब अमेरिका प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करने के लिए नए परमाणु हथियारों का विकास कर सकता है। इस संधि के बाद रूस और अमेरिका में फिर से हथियारों की दौड़ की शुरू हो सकती है।

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जम्मू-कश्मीर में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन

जम्मू-कश्मीर में राजपाल शासन के 6 माह पूरे होने के बाद अब राष्ट्रपति शासन शुरू हो गया है, अब राज्य के सम्बन्ध में नीति निर्णय इत्यादि केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा निश्चित किये जायेंगे।

पृष्ठभूमि

जून 2018 में भारत्जीय जनता पार्टी ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस लिया था, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार गिर गयी थी। इसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ था। 1996 के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

चूंकि जम्मू-कश्मीर का संविधान अलग है, इसलिए जम्मू-कश्मीर के संविधान 92 के अनुसार राज्य की वैधानिक मशीनरी कार्यशील न होने के कारण 6 महीने तक राज्यपाल शासन लागू होता है।

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