करेंट अफेयर्स एवं हिन्दी समाचार सारांश

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को डॉ कलाम स्मृति इंटरनेशनल एक्सीलेंस अवार्ड 2019 प्रदान किया गया

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को डॉ कलाम स्मृति इंटरनेशनल एक्सीलेंस अवार्ड 2019 प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान दक्षिण एशिया के लिए शांति तथा समृद्धि के लिए उनके विज़न के लिए प्रदान किया गया है। इस पुरस्कार के द्वारा भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए उनके योगदान को सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार की स्थापना भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की स्मृति में की गयी है।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

डॉ. अवुल पाकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को रामेश्वरम में हुआ था। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति थे, वे 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। इससे पहले उन्होंने रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) तथा भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) में लगभग 4 दशकों तक वैज्ञानिक तथा साइंस एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में कार्य किया। भारत के नागरिक अन्तरिक्ष कार्यक्रम तथा सैन्य मिसाइल विकास कार्यक्रम में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। मिसाइल विकास कार्यक्रम में योगदान के लिए उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ़ इन्डिया” कहा जाता है।

इसके अलावा 1998 में किये गये पोखरण-II परमाणु परीक्षण में भी उनकी काफी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वर्ष 1997 में उन्हें उनके योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2009 में उन्हें हुवर मैडल प्रदान किया गया तथा 2013 में NSS वोन ब्राउन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

डॉ. कलाम एक प्रसिद्ध लेखक भी थे, उनकी पुस्तकें विशेषतः छात्रों में काफी लोकप्रिय हैं। डॉ. कलाम द्वारा रचित प्रमुख पुस्तकें हैं : इंडिया 2020, विंग्स ऑफ़ फायर, इग्नाइटेड माइंडस, द लुमिनस स्पार्क्स, मिशन इंडिया, इंस्पायरिंग थॉट्स, इन्डोमिटेबल स्पिरिट, टर्निंग पॉइंट्स, टारगेट 3 बिलियन, फोर्ज योर फ्यूचर, ट्रांसेंडेंस : माय स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस विद प्रमुख स्वामीजी, एडवांटेज इंडिया : फ्रॉम चैलेंज टू अपोर्चुनिटी।

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भारतीय वायुसेना ने हवा-से-हवा में मार सकने वाली स्वदेशी मिसाइल ‘अस्त्र’ का सफल परीक्षण किया

भारतीय वायुसेना ने दूर हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली स्वदेशी निर्मित मिसाइल ‘अस्त्र’ का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल को सु-30 MKI लड़ाकू विमान से दागा गया। इसका परीक्षण ओडिशा में किया गया।

अस्त्र मिसाइल

अस्त्र मिसाइल दृश्यमान रेंज से दूर हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली स्वदेशी निर्मित मिसाइल है। इसका निर्माण रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया है। यह DRDO द्वारा निर्मित सबसे छोटे वेपन सिस्टम में से एक है। इसकी लम्बाई 3.8 मीटर तथा इसका भार 154 किलोग्राम है। यह एक सिंगल स्टेज मिसाइल है, इसमें ठोस इंधन का इस्तेमाल किया जाता है।

इस मिसाइल में 15 किलोग्राम पारंपरिक विस्फोटक ले जाया जा सकता है। इस मिसाइल को अलग-अलग ऊंचाई में से लांच किया जा सकता है। यह मिसाइल 4 मैक (ध्वनि की गति से चार गुना तेज़) की गति से अपने लक्ष्य को नष्ट कर सकती है। इस मिसाइल को किसी भी मौसम में लांच किया जा सकता है। इस मिसाइल में एक्टिव राडार टर्मिनल गाइडेंस, इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर (ECCM) तथा स्मोकलेस प्रोपल्शन जैसे फीचर हैं। इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर की सहायता से यह मिसाइल दुश्मन राडार के सिग्नल को जाम कर सकती है। इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना के लगभग सभी लड़ाकू विमानों जैसे सुखोई-30, MKI, मिराज-2000, मिग-29, जैगुआर तथा तेजस में उपयोग किया जा सकता है।

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