करेंट अफेयर्स एवं हिन्दी समाचार सारांश

अक्टूबर में किया जायेगा ‘हिमविजय’ युद्ध अभ्यास का आयोजन

भारतीय सेना अक्टूबर में अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लगने वाली सीमा के निकट ‘हिमविजय’ नामक युद्ध अभ्यास का आयोजन करेगी। इस अभ्यास में M777 होवित्ज़र तथा चिनूक हैवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर का उपयोग किया जायेगा।

हिमविजय अभ्यास

इस युद्ध अभ्यास का आयोजन उत्तर पूर्वी भारत में 10,000 फीट की उंचाई पर किया जायेगा। इस युद्ध अभ्यास में ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ हिस्सा लेंगे। इसमें नव गठित ’17 माउंटेन स्ट्राइक कोर’ के कौशल का परीक्षण किया जाएगा। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना भी हिस्सा लेगी।

इस अभ्यास में 15,000 सैन्य अधिकारी हिस्सा लेंगे। इस अभ्यास में C130J सुपर हर्कुलस, AN32 तथा C17 का उपयोग भी किया जायेगा।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के नौसैनिक संस्करण ने सफलतापूर्वक शार्ट अरेस्टेड लैंडिंग की

लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के नौसैनिक संस्करण ने गोवा में शोर बेस्ड टेस्ट फैसिलिटी में सफल शार्ट अरेस्टेड लैंडिंग की, यह लैंडिंग गोवा में ‘आईएनएस हंस’ पर की गयी। इसके बाद तेजस को नेवल एयरक्राफ्ट कैरियर ‘विक्रमादित्य’ पर भी लैंड किये जाने का प्रयास किया जा सकता है।

LCA (नेवी) फ्लाइट टेस्ट टीम का नेतृत्व जे.ए. माओलंकर (चीफ टेस्ट पायलट), कैप्टेन शिवनाथ दाहिय (LSO) तथा जे.डी. रतुरी (टेस्ट डायरेक्टर) द्वारा किया गया।

शोर बेस्ड टेस्ट फैसिलिटी (SBTF)

शोर बेस्ड टेस्ट फैसिलिटी एक किस्म से एयरक्राफ्ट कैरियर की फ्लाइट डेक की प्रतिलिपि है, इसके द्वारा नौसैनिक पायलट को एयरक्राफ्ट कैरियर के छोटे रनवे पर विमान को लैंड करने का अभ्यास करवाया जाता है। इसके बाद पायलट वास्तव में एयरक्राफ्ट करियर पर एयरक्राफ्ट को लैंड कर सकते हैं।

तेजस

तेजस हल्के भार वाला सिंगल सीटर लड़ाकू विमान है, इसमें एक ही इंजन उपयोग किया गया है। यह अपनी श्रेणी का विश्व का सबसे छोड़ा व सबसे हल्का सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इसका शुरूआती निर्माण 1980 के दशक में शुरू किया था, इसका निर्माण मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह लेने के लिए किया गया है। इसका नाम ‘तेजस’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रखा गया था। इस एयरक्राफ्ट को पूर्ण रूप से विकसित करने में लगभग 20 वर्षों का समय लगा।

तेजस की विशेषताएं

तेजस में quadruplex digital fly-by-wire उड़ान नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे तेजस को नियंत्रित करना आसान होता है। इसमें डिजिटल कंप्यूटर बेस्ड अटैक सिस्टम और ऑटोपायलट मोड भी हैं।

इसके छोटे आकार और कार्बन कम्पोजिट के उपयोग के कारण राडार द्वारा इसे पकड़ा जाना मुश्किल है। इसमें आधुनिक एवियोनिक सॉफ्टवेर का उपयोग किया गया, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से अपडेट किया जा सकता है।

इसकी रेंज लगभग 400 किलोमीटर है, इसका उपयोग एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशन में किया जायेगा। राफेल और सुखोई लम्बी दूरी तय करके दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।

तेजस से हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली मिसाइलें दागी जा सकती है। इसमें बम तथा अन्य प्रिसिशन गाइडेड विस्फोटक भी ले जाए जा सकते हैं। DRDO ने तेजस के परीक्षण दौरान इसमें कई प्रकार की मिसाइल इत्यादि का उपयोग किया। यह लेज़र गाइडेड बम गिराने में भी सक्षम है।

तेजस ने तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में जुलाई, 2018 से कार्य शुरू किया गया, इसे दो वर्ष पूर्व भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह भारतीय वायुसेना के 45 स्क्वाड्रन के ‘फ्लाइंग डैगर्स’ का हिस्सा है।

Categories:

Month:

Tags: , , , , , ,

Advertisement