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भारतीय नौसेना ने 3,992 भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाकर ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ पूरा किया

विदेशों से भारतीय नागरिकों स्वदेश लाने के प्रयास में, ऑपरेशन समुद्र सेतु को भारतीय नौसेना द्वारा 5 मई, 2020 को शुरू किया गया था। ऑपरेशन समुद्र सेतु 55 दिनों तक चला जिसमें 3,992 भारतीय नागरिकों को भारतीय नौसेना द्वारा समुद्री मार्ग से अपने देश वापस लाया गया।

समुद्र सेतु जैसा निकासी ऑपरेशन आखिरी बार 2015 में ऑपरेशन राहत के दौरान भारतीय नौसेना द्वारा किया गया था जब यमन से 5600 लोगों (960 विदेशी नागरिक, शेष भारतीय नागरिक) को निकाला गया था।

समुद्र सेतु में हिस्सा लेने वाले पोत

आईएनएस जलाश्व और 3 लैंडिंग शिप टैंक – आईएनएस ऐरावत, आईएनएस शार्दुल और आईएनएस मगर ने इस मिशन में भगा लिया।

इस ऑपरेशन के तहत, इन 4 भारतीय नौसेना जहाजों ने मालदीव, श्रीलंका और ईरान से COVID-19 महामारी के दौरान भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए 23,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।

ऑपरेशन समुद्र सेतु

ऑपरेशन समुद्र सेतु 8 मई को शुरू हुआ जब आईएनएस आईएनएस जलाश्व ने मालदीव की राजधानी  माले से 698 भारतीय नागरिकों को वापस लाया।

भारतीय नौसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना था कि पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी जहाज पर COVID -19 संक्रमण के फैलने की कोई घटना न हो। भारतीय नौसेना ने योजनाबद्ध उपायों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लेते हुए पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

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कैबिनेट ने PMAY-U के तहत शहरी प्रवासियों / गरीबों के लिए सस्ते किराए के आवासीय परिसर के विकास को मंजूरी दी

8 जुलाई, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल किराए के सस्ते आवासीय परिसर (ARHCs) के विकास के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इन किफायती किराये के आवास परिसरों को शहरी प्रवासियों / गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के तहत एक उप-योजना के रूप में विकसित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

PMAY-U के तहत एक उप-योजना के रूप में किराए के सस्ते आवासीय परिसर (ARHCs) की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा 14 मई, 2020 को आत्मनिर्भर भारत पैकेज का एक हिस्से के रूप में की गयी थी।

ARHCs आत्मनिर्भर भारत के विजन को कैसे पूरा करेंगे?

नोवेल कोरोनावायरस के प्रसार का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गयी थी जिसके परिणामस्वरूप देश के शहरी केंद्रों में श्रमिकों और दैनिक वेतन भोगियों के रोजगार का नुकसान हुआ। जिसके परिणामस्वरूप, देश ने शहरी केंद्रों से श्रमिकों का बड़े पैमाने पर गाँव की ओर प्रवास हुआ।

COVID-19 महामारी से पहले, यह श्रमिक शहरी क्षेत्रों के बाहर ज्यादातर झुग्गी-झोपड़ियों या अन्य अनौपचारिक और अनधिकृत कॉलोनियों में रहते थे।

सस्ते आवासीय परिसर को देश के शहरी केंद्रों में बनाया जाएगा, जहां ये प्रवासी श्रमिक एक किफायती किराए पर मकान ले सकेंगे, ये ARHC उनके कार्यस्थल के करीब होंगे।

अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स बेहतर अवसरों की तलाश में शहरी केंद्रों की ओर बढ़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से बड़ी संख्या में श्रमिकों, सेवा प्रदाताओं, छात्रों, आदि को लाभान्वित करेंगे।

ARHCs के बारे में

  • ARHCs के तहत, वर्तमान में लगभग 3 लाख लाभार्थी कवर किए जाएंगे।
  • 25 साल की रियायत समझौतों के माध्यम से, वर्तमान में खाली पड़े सरकार के आवास परिसरों को ARHCs में बदल दिया जाएगा।
  • ARHCs के तहत निर्माण के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने वाली परियोजनाओं के लिए, प्रौद्योगिकी नवाचार अनुदान के रूप में अनुमानित 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • निजी और सार्वजनिक संस्थाओं को विशेष प्रोत्साहन की पेशकश की जाएगी।

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