अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी

वैश्विक उर्जा तथा कार्बन डाइऑक्साइड स्टेटस रिपोर्ट : मुख्य बिंदु

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी ने वैश्विक उर्जा तथा कार्बन डाइऑक्साइड स्टेटस रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :

  • उर्जा मांग में चीन, अमेरिका और भारत का हिस्सा लगभग 70% है, पिछले वर्ष उर्जा मांग में 2.3% की वृद्धि हुई थी।
  • उर्जा मागं में वृद्धि के प्रमुख कारण मज़बूत वैश्विक अर्थव्यवस्था, अधिक गर्मी तथा कुछ क्षेत्रों में कूलिंग की मांग है।
  • उर्जा मांग में वृद्धि से प्राकृतिक गैस की मांग में भी वृद्धि हुई है, बढ़ते हुए उर्जा उपभोग में प्राकृतिक गैस का हिस्सा 45% है। अमेरिका और चीन में प्राकृतिक गैस में की मांग में काफी अधिक वृद्धि हुई है।
  • सभी इंधनों की मांग में भी वृद्धि हुई है, इस मांग का 70% हिस्सा जीवाश्म इंधन से पूरा किया गया।
  • सौर तथा पवन उर्जा उत्पादन में दो अंकीय वृद्धि हुई है।  सौर उर्जा उत्पादन में 31% की वृद्धि दर्ज की गयी। परन्तु यह उच्च विद्युत् मांग की पूर्ती के लिए पर्याप्त नहीं थी, इसलिए कोयले के उपयोग में वृद्धि हुई है।
  • 2018 में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 1.7% की वृद्धि हुई है, अब यह बढ़कर 33 गीगाटन हो गया है।
  • उर्जा उत्पादन में कोयले का उपयोग 10 गीगाटन से अधिक बढ़ गया है।
  • कोयले से उर्जा का अधिक उत्पादन एशिया में किया जाता है।
  • 2018 में वैश्विक विद्युत् की मांग में 4% की वृद्धि हुई, यह बढ़कर 23,000 टेरावाट ऑवर्स पर पहुँच गयी है।
  • पवन तथा सौर उर्जा सहित नाविकरणीय उर्जा में चीन अग्रणी है, इसके बाद यूरोप तथा अमेरिका हैं।

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स्वच्छ उर्जा में नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी के साथ MoU पर किये हस्ताक्षर

केन्द्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी (IEA) के साथ स्वच्छ उर्जा में नवोन्मेष के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये। इस MoU पर बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरुप तथा अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. फतीह बिरोल द्वारा हस्ताक्षर किये गए।

मुख्य बिंदु

इस MoU का उद्देश्य भारत में स्वच्छ उर्जा क्षेत्र में अनुसन्धान व विकास पर बल देना है। इस MoU के द्वारा उर्जा नीति तथा इससे सम्बंधित डाटा संग्रहण व विश्लेषण में सहयोग सुनिश्चित किया जायेगा। IEA एक स्वायत्त अंतरसरकारी संगठन है, यह 30 सदस्य देशों के साथ मिलकर विश्वसनीय, सस्ती व स्वच्छ उर्जा उपलब्ध करवाने के लिए कार्य करता है।

अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी (IEA)

अंतर्राष्ट्रीय उर्जा एजेंसी एक अंतरसरकारी संगठन है, इसकी स्थापना 1974 में आर्थिक सहयोग व विकास संगठन के तहत की गयी थी। इसकी स्थापना 1973 के तेल संकट के बाद की गयी थी, जब OPEC ने तेल की कीमतों में अत्याधिक बढ़ोतरी की थी। वर्तमान में भारत समेल IEA के 30 सदस्य देश हैं। इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित है।

IEA मुख्य तीन बिन्दुओं पर फोकस करता है : उर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण। यह वैकल्पिक उर्जा तथा उर्जा नीतियों के सन्दर्भ में भी कार्य करता है। यह 29 सदस्य देशों के लिए उर्जा नीति सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है।

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