अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन

आज मनाया जा रहा है विश्व समुद्री दिवस

सितम्बर के अंतिम बृहस्पतिवार को प्रतिवर्ष विश्व समुद्री दिवस (World Maritime Day) के रूप में मनाया जाता है। इसके द्वारा शिपिंग सुरक्षा के महत्व, समुद्री सुरक्षा तथा समुद्री वातावरण की सुरक्षा तथा समुद्री उद्योग पर प्रकाश डाला जाता है। इस वर्ष विश्व समुद्री दिवस की थीम “समुद्री समुदाय में महिलाओं का सशक्तिकरण” (Empowering Women in the Maritime Community)।

महत्व

विश्व समुद्री दिवस 1958 में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) सम्मलेन के अनुकूलन की तिथि चिन्हित करता है। इस दिवस को पहली बार 1978 में मनाया गया था। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) का शुरूआती नाम अंतरसरकारी समुद्री सलाहकार संगठन था, इसे 1982 में बदलकर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) कर दिया गया।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन

यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विशेष एजेंसी है, यह शिपिंग को विनियमित करने के कार्य करती है। इसकी स्थापना 1948 में जिनेवा में अंतर्राष्ट्रीय अंतरसरकारी समुद्री सलाहकार संगठन के रूप में गी यी थी। इसका मुख्यालय यूनाइटेड किंगडम के लन्दन में स्थित है। इसके 171 सदस्य तथा 3 एसोसिएट सदस्य हैं। भारत 1959 में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का सदस्य बना था। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का कार्य शिपिंग तथा इसके अनुमोदन के लिए एक व्यापक नियामक फ्रेमवर्क को विकसित करना है। इस फ्रेमवर्क में सुरक्षा, कानूनी मामले, पर्यावरण मामले, तकनीकी सहयोग, समुद्री सुरक्षा तथा शिपिंग दक्षता इत्यादि शामिल हैं।

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नैरोबी में किया गया पहले सतत नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन 2018 का आयोजन

केन्या की राजधानी नैरोबी में पहले सतत नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन 2018 का आयोजन 26 से 28 नवम्बर के दौरान किया गया। इसकी थीम “नीली अर्थव्यवस्था तथा  सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा” थी। इस सम्मेलन का आयोजन केन्या द्वारा किया गया, कनाडा और जापान इस सम्मेलन का सह-आयोजक थे।

मुख्य बिंदु

इस सम्मेलन में विश्व भर से लगभग 4000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से इस सम्मेलन में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिस्सा लिया। हिन्द महासागर में भारत की स्थिति सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में विश्व वन्यजीव फण्ड, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन, अंतर्राष्ट्रीय सीबेड प्राधिकरण, विश्व बैंक तथा ओशन फाउंडेशन इत्यादि ने भी हिस्सा लिया।

नीली अर्थव्यस्था से अभिप्राय समुद्री संसाधनों का उपयोग विकास, रोज़गार तथा जीवन स्तर को बेहतर करने लिए करना है। इसमें समुद्री परिवहन, मतस्य पालन, नवीकरणीय उर्जा, कचरा प्रबंधन तथा पर्यटन शामिल है।

भारत के लिए नीली अर्थव्यवस्था का महत्त्व काफी अधिक है। भारत समुद्री अधोसंरचना, अंतर्देशीय जलमार्गों तथा तटीय शिपिंग इत्यादि का विकास कर रहा है। इसके लिए भारत ने “सागरमाला कार्यक्रम लांच किया है। इसका उद्देश्य समुद्री लोजिस्टिक्स तथा बंदरगाहों का विकास करना है। इसके लिए भारत का राष्ट्रीय दृष्टिकोण “SAGAR – Security and Growth for All in IOR” शब्द के द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।

 

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