अमित शाह

यौन शोषण को रोकने के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर मंत्रीसमूह की रिपोर्ट

19 जनवरी, 2020 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता  में कार्यस्थल पर यौन शोषण को रोकने के लिए कानूनी फ्रेमवर्क रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया।

मुख्य बिंदु

मंत्री समूह का गठन अक्टूबर, 2018 में ‘मी टू’ अभियान के बाद किया गया था। जुलाई, 2019 में इस मंत्री समूह का पुनर्गठन किया गया था। इसके अलावा भारत सरकार भारतीय दंड संहिता (IPC) में बदलाव करने के लिए भी कार्य कर रही है। गौरतलब है कि भारतीय दंड संहिता को ब्रिटिश शासनकाल में 1860 में शुरू किया गया था। मंत्रियों ने मज़बूत कानून की अनुशंसा की है।

यह रिपोर्ट विशाखा दिशानिर्देश पर आधारित है, सर्वोच्च न्यायालय ने विशाखा दिशानिर्देश को 1997 में जारी किया गया था। कार्यस्थल व महिला यौन शोषण, 2013 का गठन विशाखा दिशानिर्देश के आधार पर किया गया था।

महत्व

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2017 में कार्यस्थल में महिलाओं के यौन शोषण के 479 मामले आये थे, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 401 था। इन मामलों को भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत दर्ज किया गया था, इनमे से सर्वाधिक मामले दिल्ली, पुणे, बंगलुरु और मुंबई में दर्ज किये गये थे।

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गृह मंत्री अमित शाह ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ का उद्घाटन किया

देश के गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में 10 जनवरी, 2020 को आधुनिक ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ का उद्घाटन किया। इसके साथ उन्होंने ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ राष्ट्र को समर्पित किया।

मुख्य बिंदु

‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ को केंद्र सरकार नें अक्टूबर, 2018 में मंज़ूरी दी थी। इसका निर्माण 415.86 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इस केंद्र के द्वारा देश में सभी प्रकार के साइबर अपराध से सम्बंधित मुद्दों का समाधान किया जाएगा।

अब तक 15 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य में क्षेत्रीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की स्थापना करने के लिए सहमती प्रकट की है।

इस वेब पोर्टल को 30 अगस्त, 2019 को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लांच किया गया था। अब तक देश भर के 700 जिलों के 3,900 पुलिस स्टेशनों को इससे जोड़ा जा चुका है।

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