अमित शाह

भुवनेश्वर में किया जाएगा ईस्टर्न जोनल काउंसिल की बैठक का आयोजन

ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के लिए ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की बैठक का आयोजन गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में किया जाएगा। इस बैठक में महिलाओं के खिलाफ बलात्कार के मामलों, यौन अपराधों, भारत-बांग्लादेश सीमा में पशु तस्करी की रोकथाम इत्यादि  पर चर्चा की जाएगी।

मुख्य बिंदु

इस बैठक में गृह मंत्री भाग लेने वाले चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे। इस दौरान दंड प्रक्रिया संहिता के संशोधनों की स्थिति की समीक्षा भी की जायेगी। संशोधन के तहत, आपराधिक मामलों की जांच पूरी होने की समय सीमा दो महीने तक सीमित थी। यह कार्य आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2018 के द्वारा  किया गया था।

वेस्टर्न जोनल काउंसिल और नॉर्दर्न जोनल काउंसिल की हालिया बैठकों में गृह मंत्री ने राज्य पुलिस को लंबित मामलों का यथाशीघ्र समाधान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा यौन अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग प्रणाली में मामले के विवरण को अपडेट करने का भी निर्देश दिया गया था। यह एक ऑनलाइन पोर्टल है जो राज्यों को विभिन्न मामलों की रियल टाइम निगरानी और ​​प्रबंधन में मदद करता है।

जोनल काउंसिल

जोनल काउंसिल राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत गठित वैधानिक निकाय हैं। इस अधिनियम के अनुसार, भारत को 5 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक परिषद का गठन किया गया है। यह पांच जोन हैं : उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी, दक्षिणी और मध्य। 1971 में उत्तर पूर्वी परिषद बनाई गई थी।

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यौन शोषण को रोकने के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर मंत्रीसमूह की रिपोर्ट

19 जनवरी, 2020 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता  में कार्यस्थल पर यौन शोषण को रोकने के लिए कानूनी फ्रेमवर्क रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया।

मुख्य बिंदु

मंत्री समूह का गठन अक्टूबर, 2018 में ‘मी टू’ अभियान के बाद किया गया था। जुलाई, 2019 में इस मंत्री समूह का पुनर्गठन किया गया था। इसके अलावा भारत सरकार भारतीय दंड संहिता (IPC) में बदलाव करने के लिए भी कार्य कर रही है। गौरतलब है कि भारतीय दंड संहिता को ब्रिटिश शासनकाल में 1860 में शुरू किया गया था। मंत्रियों ने मज़बूत कानून की अनुशंसा की है।

यह रिपोर्ट विशाखा दिशानिर्देश पर आधारित है, सर्वोच्च न्यायालय ने विशाखा दिशानिर्देश को 1997 में जारी किया गया था। कार्यस्थल व महिला यौन शोषण, 2013 का गठन विशाखा दिशानिर्देश के आधार पर किया गया था।

महत्व

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2017 में कार्यस्थल में महिलाओं के यौन शोषण के 479 मामले आये थे, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 401 था। इन मामलों को भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत दर्ज किया गया था, इनमे से सर्वाधिक मामले दिल्ली, पुणे, बंगलुरु और मुंबई में दर्ज किये गये थे।

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