अशोक लेलैंड

अशोक लेलैंड हैवी ड्यूटी ट्रक के लिए BS-VI प्रमाणीकरण हासिल करने वाली पहली वाणिज्यिक वाहन निर्माता कंपनी बनी

अशोक लेलैंड हैवी ड्यूटी ट्रक के लिए BS-VI प्रमाणीकरण हासिल करने वाली पहली वाणिज्यिक वाहन निर्माता कंपनी बन गयी है। शुरुआत में इन ट्रकों को एनसीआर-राजस्थान जैसे क्षेत्रों में बेचा जायेगा, जहाँ पर बीएस-VI इंधन उपलब्ध है। BS-VI मानक 1 अप्रैल, 2020 से लागू होंगे। अशोक लेलैंड हिंदुजा ग्रुप की कम्पनी है।

BS-IV तथा BS-VI में क्या अंतर है?

  • BS-IV तथा BS-VI में मुख्य अंतर सल्फर की मात्रा है।
  • BS-IV इंधन में 50 पार्ट्स पैर मिलियन (ppm) सल्फर की मात्रा पायी जाती है, जबकि BS-VI इंधन में केवल 10 ppm सल्फर की मात्रा पायी जाती है।
  • BS-VI से डीजल चारों में पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा में 80% की कमी आएगी।
  • BS-VI से डीजल कारों में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा में 70% तथा पेट्रोल कारों में 25% की कमी आएगी।

भारत स्टेज उत्सर्जन मानक  (Bharat Stage Emission Standards)

यह भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया उत्सर्जन मानक है, यह यूरोपियन रेगुलेशन पर आधारित है। इसका उद्देश्य वाहनों द्वारा उत्सर्जित किये जाने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है। भारत स्टेज के मानक व समय सीमा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निश्चित की जाती है। यह मानक देश में पहली बार वर्ष 2000 में शुरू किये गए थे। देश में नए वाहनों का निर्माण इन मानकों के आधार पर ही किया जाता है। अक्टूबर 2010 में भारत स्टेज III मानक पूरे देश में लागू किये गए थे, अप्रैल 2017 से पूरे देश में BS-IV पूरे देश में लागू किया गया। 2016 में सरकार ने घोषणा की थी देश में BS-V लागू नहीं होगा, इसके स्थान पर BS-VI ही लागू किया जायेगा। भारत सरकार की योजना 2020 से BS-VI मानक लागू करने की है।

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अशोक लेलैंड करेगा भारतीय सेना को 10×10 भारी वाहनों की आपूर्ति

भारतीय सेना ने अशोक लेलैंड से 81 हाई मोबिलिटी 10×10 वाहनों की आपूर्ति के लिए 100 करोड़ रुपये का करार किया है। यह ऐसा पहला मौका है जब कोई भारतीय कंपनी लॉन्चर्स के लिए हैवी ड्यूटी व हाई मोबिलिटी वाहन निर्मित करेगी। इससे भारत के आयातों में भी कमी आएगी।

मुख्य बिंदु

अशोक लेलैंड द्वारा यह हैवी ड्यूटी और हाई मोबिलिटी वाहन भारत में ही डिजाईन व विकसित किये जायेंगे। यह नए वाहन भारतीय सेना द्वारा उपयोग किये जाने वाले रूसी स्मर्च मल्टी-बैरल राकेट लॉन्चर्स का स्थान लेंगे। इसके अलावा इनका उपयोग रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) द्वारा निर्मित मिसाइल को ले जाने के लिए भी किया जायेगा।

इस स्वदेशी 10×10  वाहन में अशोक लेलैंड 360 HP वाला नेपच्यून इंजन इस्तेमाल किया जायेगा। यह 60 किलोमीटर की अधिकतम रफ़्तार पर 27 टन भार ढोने की क्षमता रखता है। इनमे से कुछ एक वाहनों को राकेट हैंडलिंग क्रेन के लिए निर्मित किया जायेगा। इन वाहनों की आपूर्ति अगले वित्त वर्ष में शुरू होगी और एक साल में यह आपूर्ति पूरी कर दी जाएगी।

पृष्ठभूमि

भारत ने 12 ट्यूब, 300 मि.मी. स्मर्च सिस्टम की दो रेजिमेंट रूस से 2600 करोड़ रुपये में खरीदी थी, यह करार 2015 के अंत में किया गया था। बाद में दूसरे सौदे में अतिरिक्त सिस्टम की मांग की गयी। प्रत्येक रेजिमेंट में 6 लॉन्चर्स की दो बैटरी होती हैं। स्मर्च की रेंज 90 किलोमीटर है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनियों द्वारा सेना के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त वाहन तैयार किये गए हैं, इससे भारत के आयातों को कम करने में काफी सहायता मिली है। इसके अलावा अशोक लेलैंड ने DRDO से 12×12 वाहन निर्मित करने के लिए भी करार किया है, इनके द्वारा लम्बी दूरी वाली मिसाइल वहन की जाएँगी। यह वाहन अधिकतम 34 टन भार उठाने में सक्षम हैं।

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