असम

गुवाहाटी में हुआ खेलो इंडिया यूथ गेम्स के तीसरे संस्करण का आगाज़

2020 खेलों इंडिया यूथ गेम्स के तीसरे संस्करण का आरंभ गुवाहाटी में हो गया है। इसका आयोजन 10 फरवरी, 2020 से 22 फरवरी, 2020 के दौरान किया जाएगा।

खेलो इंडिया यूथ गेम्स

केन्द्रीय खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया स्कूल गेम्स के दायरे को बढ़ाकर बड़ा कर दिया है, इन खेलों में अब दो श्रेणियों, अंडर 17 और अंडर 21 में प्रतिभागी हिस्सा ले सकते हैं। इसमें कॉलेज और विश्वविद्यालय के खिलाड़ी भी हिस्सा ले सकते हैं। इन खेलों में 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से 10,000 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं।

खेलो इंडिया कार्यक्रम

इसकी शुरुआत केन्द्रीय खेल व युवा मामले मंत्रालय द्वारा देश में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए की थी। इसका उद्देश्य देश  में खेले जाने वाले सभी खेलों को बढ़ावा देना तथा भारत को एक मज़बूत खेल राष्ट्र के रूप में तैयार करना है। इस कार्यक्रम से युवा खिलाड़ियों को अपने कौशल को बेहतर करने तथा अपने कौशल का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। इन खेलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों को चिन्हित किया जायेगा तथा प्रत्येक चुने गये खिलाड़ी को 8 वर्षों के लिए 5 लाख  रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी।

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कैबिनेट ने असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट को केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सौंपा

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन करने वाली सार्वजनिक उद्यम की इकाई ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड का प्रशासनिक नियंत्रण केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकतिक गैस मंत्रालय को सौंपने के लिए मंज़ूरी दी है। इससे पहले ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड का प्रशासनिक नियंत्रण केन्द्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय के अधीन रसायन व पेट्रोकेमिकल विभाग के पास था।

असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट

15 अगस्त, 1985 को असम एकॉर्ड पर हस्ताक्षर के बाद यह परियोजना अस्तित्व में आई थी। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है। इस परियोजना के तहत प्रतिवर्ष 2 लाख टन ईथीलीन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह उत्तर-पूर्वी भारत में प्रथम पेट्रोकेमिकल परियोजना है। इसके पहले चरण को लम्बी देरी के बाद 2015 में कमीशन किया गया था।

इस परियोजना को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने अप्रैल 2006 में मंज़ूरी दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस परियोजना के लिए लेपेतकाता (डिब्रूगढ़ से 15 किलोमीटर दूर) ने आधारशिला रखी थी। गौरतलब है कि इस परियोजना को अप्रैल, 2012 में पूरा किया जाना था, परन्तु इसे नवम्बर, 2015 में कमीशन किया जा सका।

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