आंध्र प्रदेश कैबिनेट

आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने विधानपरिषद को समाप्त करने के लिए मंज़ूरी दी

27 जनवरी, 2020 को आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने विधानपरिषद को समाप्त करने के लिए मंज़ूरी दी। गौरतलब है कि हाल ही में विधानपरिषद ने दो बिलों को लटकाया था, इसमें  आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण निरस्तीकरण बिल तथा विकेन्द्रीकरण बिल शामिल थे।

राज्य विधानपरिषद

आंध्र प्रदेश देश के उन चुनिन्दा राज्यों में से एक है जहाँ पर विधानपरिषद मौजूद है, इसके अलावा बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना  में भी विधानपरिषद मौजूद है।

संवैधानिक व्यवस्था

अनुच्छेद 169 में विधानपरिषद को परिभाषित किया गया है। नवम्बर, 2019 में 6 राज्यों में विधानपरिषद मौजूद थी। राज्यों की विधानपरिषद के सदस्यों का चुनाव निम्नलिखित विधि से किया जाता है :

  • एक तिहाई सदस्यों का चयन स्थानीय निकायों जैसे ग्राम पंचायत, नगर पालिका तथा जिला परिषद के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  • एक तिहाई सदस्यों को राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
  • 1/6 सदस्यों को राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।
  • 1/12 सदस्यों को  स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो राज्य में पिछले तीन साल से रह रहे हैं।
  • 1/12 सदस्यों को राज्य के अध्यापकों (सेकेंडरी स्कूल, महाविद्यालय व विश्वविद्यालय) द्वारा चुना जाता है।

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आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने दिशा बिल को मंज़ूरी दी

आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने दिशा बिल को मंज़ूरी दे दी है, इस बिल के द्वारा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। दिशा बिल को आंध्र प्रदेश क्रिमिनल लॉ (संशोधन) बिल के नाम से भी जाना जाता है।

मुख्य बिंदु

इस बिल के द्वारा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए कड़ी सजा दी जायेगी, इस बिल का उद्देश्य महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अलावा कैबिनेट ने महिला व बाल अधिनियम, 2019 के तहत महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना को भी मंज़ूरी दी है। यह कोर्ट पोक्सो अधिनियम के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई भी करेंगे।

इस बिल के मुताबिक मामले के पंजीकरण के 21 दिन के भीतर निर्णय घोषित किया जाना चाहिए। इसके तहत बलात्कार तथा तेजाब हमलों को विशेष महत्व दिया जायेगा। इस नए कानून में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।

इस नए कानून के तहत बच्चों के विरुद्ध यौन शोषण के अपराधों के लिए दोषियों को 10 से 14 वर्ष कैद की सजा दी जा सकती है। इस कानून के तहत उन लोगों के विरुद्ध भी कड़ी कारवाई की जायेगी जो सोशल मीडिया पर महिलाओं के विरुद्ध अभद्र पोस्ट अपलोड करते हैं, इस मामले में पहली बार अपराध करने वाले व्यक्ति को दो वर्ष की जेल की सज़ा तथा दूरी बार अपराध दोहराने वाले व्यक्ति को चार वर्ष कैद की सजा दी जा सकती है।

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