आंध्र प्रदेश

रानी रशमोनी: भारतीय तटरक्षक जहाज विशाखापत्तनम में शुरू

भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में तेज पहरेदार जहाज आईसीजीएस रानी रशमोनी को चालू कर दिया है. आईसीजी की तेज पहरेदार जहाज परियोजना की श्रृंखला में कमीशन प्राप्त करने वाला यह पांचवां और आखिरी जहाज है. जहाज विशाखापत्तनम में कमांडर के प्रशासनिक और परिचालन नियंत्रण के तहत, तट नं. 6 रक्षक जिला मुख्यालय (आंध्र प्रदेश) में स्थित होगा.

आईसीजीएस रानी रशमोनी

आईसीजीएस रानी रश्मोनी जहाज की रूप रेखा देने और इसे बनाने का कार्य हिंदुस्तान शिप यार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है. यह जहाज 51 मीटर लंबा, 8.36 मीटर चौड़ा है तथा इसका वजन 346 टन है. इसका नाम कोलकाता की महान रानी रश्मोनी के नाम पर रखा गया है. यह जहाज सबसे उन्नत और परिष्कृत संचार और नेविगेशन सेंसर और उपकरणों से युक्त है.

जहाज को 2,720 किलोवाट क्षमता के तीन एमटीयू 40000 श्रृंखला डीजल इंजनों द्वारा संचालित किया जाता है. यह अधिकतम 34 समुद्री मील प्रति घंटे (63 किमी प्रति घंटे) की गति से चल सकता है. यह निगरानी, खोज और बचाव, हस्तक्षेप, विरोधी तस्करी और विरोधी शिकार अभियान जैसे बहुआयामी कार्यों को भी कर सकता है.

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आंध्र प्रदेश ऑटो-डिसेबल सिरिंज का उपयोग करने वाला पहला राज्य बना

आंध्र प्रदेश संक्रमण को रोकने के लिए सभी चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए ऑटो-डिसेबल सिरिंज का उपयोग करने में भारत का पहला राज्य बनने जा रहा है. राज्य 28 जुलाई को हर साल मनाए जाने वाले विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day) से इस निर्णय को लागू करेगा.

मुख्य बिंदु

ऑटो-डिसेबल सिरिंज एक चिकित्सा सिरिंज है जिसे पुन: उपयोग में नहीं लाया जा सकता. चिकित्सा उपकरण क्षेत्र ने भी आंध्र प्रदेश के संक्रमण रोकने के लिए इस उठाए गए कदम की सराहना की है. एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AIMED) के अनुसार आंध्र प्रदेश यह कदम उठाने वाला भारत का पहला राज्य है. मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू सरकार द्वारा लिए गए फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि संक्रमण की रोकथाम के हिस्से के रूप में सभी नैदानिक और चिकित्सीय मामलों में ऑटो-डिसेबल सिरिंज के सार्वभौमिक उपयोग को अनिवार्य करके एक सिरिंज से एक ही इंजेक्शन दिया जाएगा. एआईएमईडी के समन्वयक राजीव नाथ ने आंध्र प्रदेश सरकार की इस पहल की सरहना की और केंद्र सरकार व अन्य राज्यों से आंध्र सरकार के नेतृत्व वाले इस कदम का अनुकरण करने का आग्रह भी किया. ताकि संक्रमण के चक्र को तोड़कर स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत किया जा सके.

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