आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने दिशा बिल को मंज़ूरी दी

आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने दिशा बिल को मंज़ूरी दे दी है, इस बिल के द्वारा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। दिशा बिल को आंध्र प्रदेश क्रिमिनल लॉ (संशोधन) बिल के नाम से भी जाना जाता है।

मुख्य बिंदु

इस बिल के द्वारा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए कड़ी सजा दी जायेगी, इस बिल का उद्देश्य महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अलावा कैबिनेट ने महिला व बाल अधिनियम, 2019 के तहत महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना को भी मंज़ूरी दी है। यह कोर्ट पोक्सो अधिनियम के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई भी करेंगे।

इस बिल के मुताबिक मामले के पंजीकरण के 21 दिन के भीतर निर्णय घोषित किया जाना चाहिए। इसके तहत बलात्कार तथा तेजाब हमलों को विशेष महत्व दिया जायेगा। इस नए कानून में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।

इस नए कानून के तहत बच्चों के विरुद्ध यौन शोषण के अपराधों के लिए दोषियों को 10 से 14 वर्ष कैद की सजा दी जा सकती है। इस कानून के तहत उन लोगों के विरुद्ध भी कड़ी कारवाई की जायेगी जो सोशल मीडिया पर महिलाओं के विरुद्ध अभद्र पोस्ट अपलोड करते हैं, इस मामले में पहली बार अपराध करने वाले व्यक्ति को दो वर्ष की जेल की सज़ा तथा दूरी बार अपराध दोहराने वाले व्यक्ति को चार वर्ष कैद की सजा दी जा सकती है।

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आंध्र प्रदेश सरकार ने YSR मत्स्यकारा भरोसा योजना लांच की

विश्व मत्स्य पालन दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने YSR मत्स्यकारा भरोसा योजना लांच की है। यह योजना मछुआरों के लिए लांच की गयी है। इस योजना के तहत 1,32,332 मछुआरों को अप्रैल से जून की अवधि तथा समुद्री प्रतिबन्ध के दौरान 10,000 रुपये की मौद्रिक राहत मिलेगी। इसका लाभ 21 से 60 वर्ष के मछुआरों को मिलेगा। इसके अलावा मोटर बोट के लिए डीजल पर सब्सिडी को 6.03 रुपये से बढ़ाकर 9 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

विश्व मत्स्य पालन दिवस

21 नवम्बर को विश्व भर में विश्व मतस्य पालन दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मतस्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका तथा महासागरीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुनिश्चित करना है। इस दौरान रैली, वर्कशॉप, बैठक, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा प्रदर्शनी इत्यादि का आयोजन किया जाता है।

भारत में मतस्य उद्योग

मतस्य उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का अति महत्वपूर्ण हिस्सा है, इससे देश में लाखों लोगों को रोज़गार प्राप्त होता है तथा इससे देश में खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। भारत की तटीय रेखा लगभग 8,000 किलोमीटर है तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) 2 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। भारतीय अर्थव्यवस्था में मतस्य उद्योग का योगदान सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में 1.07% है। मतस्य पालन भारत में कृषि व सम्बंधित क्षेत्र 5.5% हिस्सा है।

भारत में मतस्य क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण भाग अंतर्देशीय मतस्य है, इसमें नदी, झीलें, जलाशय, तालाब इत्यादि प्रमुख हैं। भारत में 1950 में अंतर्देशीय मतस्य उत्पादन 1,92,000 टन था, वर्ष 2007 में यह बढ़कर 7,81,846 टन पहुँच गया था।

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