आईएनएस विक्रमादित्य

लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के नौसैनिक संस्करण ने सफलतापूर्वक आईएनएस विक्रमादित्य पर लैंडिंग की

लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के नौसैनिक संस्करण ने भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरिएर आईएनएस विक्रमादित्य पर सफल लैंडिंग की। आईएनएस विक्रमादित्य के डेक पर लैंड करने के बाद 87 मीटर के दूरी में पूरी तरह से रुक गया।

तेजस

तेजस हल्के भार वाला सिंगल सीटर लड़ाकू विमान है, इसमें एक ही इंजन उपयोग किया गया है। यह अपनी श्रेणी का विश्व का सबसे छोड़ा व सबसे हल्का सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इसका शुरूआती निर्माण 1980 के दशक में शुरू किया था, इसका निर्माण मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह लेने के लिए किया गया है। इसका नाम ‘तेजस’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रखा गया था। इस एयरक्राफ्ट को पूर्ण रूप से विकसित करने में लगभग 20 वर्षों का समय लगा।

तेजस की विशेषताएं

तेजस में quadruplex digital fly-by-wire उड़ान नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे तेजस को नियंत्रित करना आसान होता है। इसमें डिजिटल कंप्यूटर बेस्ड अटैक सिस्टम और ऑटोपायलट मोड भी हैं।

इसके छोटे आकार और कार्बन कम्पोजिट के उपयोग के कारण राडार द्वारा इसे पकड़ा जाना मुश्किल है। इसमें आधुनिक एवियोनिक सॉफ्टवेर का उपयोग किया गया, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से अपडेट किया जा सकता है।

इसकी रेंज लगभग 400 किलोमीटर है, इसका उपयोग एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशन में किया जायेगा। राफेल और सुखोई लम्बी दूरी तय करके दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।

तेजस से हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली मिसाइलें दागी जा सकती है। इसमें बम तथा अन्य प्रिसिशन गाइडेड विस्फोटक भी ले जाए जा सकते हैं। DRDO ने तेजस के परीक्षण दौरान इसमें कई प्रकार की मिसाइल इत्यादि का उपयोग किया। यह लेज़र गाइडेड बम गिराने में भी सक्षम है।

तेजस ने तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में जुलाई, 2018 से कार्य शुरू किया गया, इसे दो वर्ष पूर्व भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह भारतीय वायुसेना के 45 स्क्वाड्रन के ‘फ्लाइंग डैगर्स’ का हिस्सा है।

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आईएनएस विशाल : भारत और यूनाइटेड किंगडम अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरिएर का निर्माण कर सकते हैं

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच  अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरिएर के निर्माण के लिए वार्ता जारी है, यह एयरक्राफ्ट कैरिएर ब्रिटेन के HMS क्वीन एलिज़ाबेथ की रेप्लिका (प्रतिलिपि) होगा। यह वार्ता “मेक इन इंडिया” पहल का हिस्सा है। इस एयरक्राफ्ट कैरिएर का नाम आईएनएस विशाल रखा जायेगा। यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा युद्धपोत होगा।

मुख्य बिंदु

यूनाइटेड किंगडम के एयरक्राफ्ट कैरिएर के डिजाईन का स्वामित्व ब्रिटिश तथा फ़्रांसिसी एयरोस्पेस कंपनियों BAE और थेल्स के पास है। इन कंपनियों के साथ भारत की समझौता वार्ता जारी है। इस एयरक्राफ्ट कैरिएर का डिजाईन भारतीय नौसेना की आवश्यकता के अनुसार कुछ परिवर्तित भी किया जायेगा। सौदे पर सहमती बनने के बाद इस युद्धपोत का निर्माण भारत में “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत किया जायेगा। इसके कुछ पुर्जों की आपूर्ति यूनाइटेड किंगडम से की जा सकती है।

यह नया एयरक्राफ्ट कैरिएर आईएनएस विक्रमादित्य (45,000 टन भार वाले कैरिएर को भारत ने रूस से 2004 में खरीदा था) तथा आईएनएस विक्रांत (40,000 टन भार वाला कैरिएर अभी निर्माणाधीन है) के साथ मिलकर कार्य करेगा।

HMS क्वीन एलिज़ाबेथ

HMS क्वीन एलिज़ाबेथ 65,000 भार वाला ब्रिटिश युद्धपोत है। यह रॉयल नेवी के लिए निर्मित अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है। इस युद्धपोत पर 60 एयरक्राफ्ट ले जाए जा सकते हैं। इसका नाम महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम के सम्मान में रखा गया है।

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