आयुष मंत्रालय

आयुष मंत्रालय तथा CSIR ने MoU पर हस्ताक्षर किये

आयुष मंत्रालय तथा वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) ने अनुसन्धान तथा शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये।

मुख्य बिंदु

इस MoU के तहत दोनों संगठन निम्नलिखित कार्य के लिए सहयोग करेंगे :

  • मूलभूत अनुसन्धान
  • आयुष से सम्बंधित निदान उपकरण, माइक्रोबायोम लिंकिंग, बहु-औषधीय फार्मूलेशन तथा मानकीकरण।
  • भारतीय औषधि पद्धति के साथ आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का एकीकरण।
  • भारतीय चिकित्सा पद्धति  से सम्बंधित प्राचीन ज्ञान के संरक्षण के लिए सहयोग।
  • आयुर्वेद, सिद्ध तथा यूनानी में अंतर्राष्ट्रीय मानकीकृत शब्दावली का विकास।

आयुष

भारत में प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास काफी पुराना है, भारत में 5000 वर्षों से भी अधिक समय से प्राकृतिक व वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली का उपयोग किया जाता रहा है। आयुष का पूर्ण संस्करण आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होमियोपैथी है (AYUSH : Ayurveda, Yoga and Naturopathy, Unani, Siddha and  Homoeopathy)।

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राष्ट्रीय यूनानी दिवस

राष्ट्रीय यूनानी दिवस प्रतिवर्ष 11 फरवरी को मनाया जाता है, इसे यूनानी शोधकर्ता हकीम अजमल खान की जन्म वर्षगांठ के अवसर पर मनाया जाता है। वे एक यूनानी विशेषज्ञ थे। यूनानी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में यूनानी औषधि पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसका आयोजन केन्द्रीय यूनानी औषधि अनुसन्धान परिषद् द्वारा किया जा रहा है। इस सम्मेलन में जन स्वास्थ्य में यूनानी औषधि के महत्व को रेखांकित किया गया। इस सम्मेलन में लगभग 1300 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

यूनानी औषधि प्रणाली

यह एक किस्म की पर्शियन-अरबी पारंपरिक औषधि प्रणाली है। इसका उपयोग मुगलकालीन भारत में किया गया, इसके अतिरिक्त दक्षिण एशियाई तथा मध्य एशिया में भी यूनानी चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का आरंभ यूनान में हुआ था। हिप्पोक्रेट्स को इस चिकित्सा पद्धति का जनम माना जाता है। भारत में इस चिकित्सा पद्धति की शुरुआत 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ हुई थी।

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