आयुष मंत्रालय

सीएसटीटी ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी उद्देश्यों के लिए आयुष शब्द अपनाया

वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी) ने वैज्ञानिक तथा तकनीकी उद्देश्यों के लिए हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में ‘आयुष’ शब्द को अपनाया है। इस संबंध में यह निर्णय आयुष मंत्रालय के प्रस्ताव का पालन करता है। आयुष शब्द चिकित्सा के पांच पारंपरिक और पूरक प्रणालियों, अर्थात् आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी हेतु संक्षिप्त नाम के रूप में लोकप्रिय सिद्ध हो गया है।

मुख्य तथ्य

सीएसटीटी ने “आयुष” शब्द को स्वास्थ्य देखभाल और उपचार के पारंपरिक और गैर-परंपरागत प्रणालियों के साथ अनुमोदित किया है जिसमें आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, होम्योपैथी इत्यादि शामिल हैं। अब शब्द का आधिकारिक तौर पर सभी सरकारी संचारों में उपयोग किया जाएगा।

महत्व

हिंदी और अंग्रेजी में आयुष शब्द का उपयोग भारत में परंपरागत चिकित्सा की सभी समग्र प्रणालियों के एकीकरण को रेखांकित करेगा। यह देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिए एकीकृत समाधान विकसित करने के लिए आयुष मंत्रालय के प्रयासों को सहायता प्रदान करेगा।

यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी) में भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए जगह खोजने के भारत के प्रयासों को भी बढ़ावा देगा।

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10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया गया

संपूर्ण विश्व में 10 अप्रैल, 2018 को ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ के रूप में मनाया गया । होम्योपैथी के संस्थापक जर्मनी के डॉ. क्रिश्चिन फ्रेडरिक सैमुएल हैनीमैन के जन्मदिन के उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है।

मुख्य तथ्य

० आयुष मंत्रालय की ओर से 10 और 11 अप्रैल को इस अवसर पर नई दिल्‍ली में दो दिवसीय विज्ञान सम्‍मेलन का आयोजन किया जायेगा ।
० “नवाचार, विकास और प्रगति: चालीस वर्षों से विज्ञान की खोज” इस वर्ष सम्‍मेलन का मुख्‍य विषय है।
० सम्‍मेलन के प्रतिभागियों में होम्‍योपैथी चिकित्‍सक,होम्‍योपैथी के अनुसंधानकर्त्ता, शिक्षक तथा उद्योगपतियों सहित विभि‍न्‍न होम्‍योपैथिक संगठनों के प्रतिनिधि भी होंगे।
० डॉ. क्रिश्चिन फ्रेडरिक सैमुएल हैनीमैन की यह 263वीं जयंती है।

होम्योपैथी

यह एक चिकित्सा पद्धति है। डॉ॰ क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हैनीमैन होम्‍योपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के जन्‍मदाता है। चिकित्सा के ‘समरूपता के सिंद्धात’ पर यह आधारित है चिकित्सक का मुख्य कार्य होमियोपैथी पद्धति में रोगी द्वारा बताए गए जीवन-इतिहास एवं रोगलक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करनेवाली औषधि का चुनाव करना है। रोग के लक्षण एवं औषधि के लक्षण में जितनी अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है। चिकित्सक का अनुभव ही उसका सबसे बड़ा सहायक होता है।

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