आयुष मंत्रालय

औषधि प्रणालियों के क्षेत्र में भारत और ईरान के बीच सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन को मंजूरी

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पारंपरिक औषधि प्रणालियों के क्षेत्र में भारत और ईरान के बीच सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी है।

लाभः

ज्ञापन से पारंपरिक औषधि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक धरोहर के मद्देनजर यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

समझौता-ज्ञापन के दायरे में निम्‍नलिखित सहयोग क्षेत्र है:

-चिकित्‍सकों और स्‍वास्‍थ्‍य प्रोफेशनलों के प्रशिक्षण में अनुभव का आदान-प्रदान।
-मानव संसाधन विकास में सहायता और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की स्‍थापना।
-औषध, चिकित्‍सा उपकरणों और प्रसाधन का नियमन तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान।
-चिकित्‍सा शोध, नई प्रौद्योगिकियों और ज्ञान आधारित पहलों के क्षेत्र में सहयोग।
-सतत विकास लक्ष्‍य ,जन स्‍वास्‍थ्‍य और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य में सहयोग,
-आपस में तय किए जाने वाले अन्य क्षेत्रों में सहयोग।
-सहयोग के विवरण हेतु तथा स्‍पष्‍टता के लिए एक कार्य समूह का गठन तथा इस समझौता ज्ञापन का कार्यान्‍वयन

पृष्ठभूमिः

भारत को सुविकसित पारंपरिक औषधि प्रणालियों का वरदान प्राप्त है, जिसमें जड़ी-बूटियां शामिल हैं। स्वास्थ्य परिदृश्य में इसकी अपार क्षमता मौजूद है।

भारत और ईरान के बीच कई विशेषताएं समान हैं भाषा, संस्कृति और परंपराओं में समानता है तथा दोनों ही देश जड़ी-बूटियों का समान रूप से प्रयोग करते हैं। दोनों देशों में वृहद जैव-विविधता मौजूद है पारंपरिक औषधि प्रणालियों का प्रायः इस्तेमाल किया जाता है। दोनों ही देशों में दुर्लभ औषधीय पौधे पाए जाते हैं। ईरान, पारंपरिक औषधि प्रणाली के क्षेत्र में भारत की अग्रणी देश की स्थिति को मान्यता देता है। भारत में इस क्षेत्र में मजबूत संरचना मौजूद है और यहां उत्कृष्ट उत्पादन इकाईयां काम करती है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को पारंपरिक औषधि प्रणालियों के प्रोत्साहन, प्रचार और पूरे विश्व में प्रस्तुत करने का अधिकार है। इस प्रणाली में आर्युवेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिगपा और होम्योपैथी शामिल हैं। आयुष मंत्रालय ने इस दिशा में चीन, मलेशिया, त्रिनिदाद एवं टोबेगो, बांग्लादेश, नेपाल, हंगरी, मॉरिशस और मंगोलिया के साथ पारंपरिक औषधि संबंधी समझौता-ज्ञापन किए हैं। श्रीलंका के साथ भी ऐसे समझौते का प्रस्ताव है।

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