आर्थिक आधार पर आरक्षण

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर (द्वितीय संशोधन) विधेयक को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर (द्वितीय संशोधन) विधेयक को मंज़ूरी दे दी है। इस विधेयक के द्वारा राज्य में निर्धन लोगों को सरकारी नौकरियों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में 10% आरक्षण प्रदान किया जायेगा।

आर्थिक आधार पर आरक्षण

इस आरक्षण का लाभ उन्हें मिलेगा जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है तथा जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है।

केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को आरक्षण प्रदान करने के लिए संवैधानिक संशोधन को मंज़ूरी दी थी। इस बिल को 8 जनवरी को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था, जबकि राज्यसभा द्वारा इस बिल को 9 जनवरी को पारित किया गया था। बाद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बिल पर हस्ताक्षर किये थे।

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सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण पर रोक लगाने से इनकार किया

सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक आधार पर 10% पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय में आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण के विरुद्ध कई याचिकाएं दायर की गयी थी। इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जायेगी।

आर्थिक आधार पर आरक्षण

इस आरक्षण का लाभ उन्हें मिलेगा जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है तथा जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है।

इस 10% आरक्षण के कारण आरक्षण पहले से मौजूद 50%  से अधिक हो जायेगा।

इस आरक्षण के लिए सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करना होगा।

क्या यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध है?

मंडल केस में सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के लिए 10% आरक्षण के प्रस्ताव को गलत ठहराया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुच्छेद 16 (4) के मुताबिक सामाजिक पिछड़ेपन के बिना आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ापन आरक्षण का आधार नही बन सकता।

इंद्रा साहनी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था थी नौकरी, शिक्षा तथा विधायिका में कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता।

सरकार इस निर्णय को किस प्रकार लागू कर सकती है?

इस निर्णय को लागू करने के लिए संविधान की नौवीं अनुसूची में परिवर्तन करना  होगा। इसका एक उदारहण तमिलनाडु से सम्बंधित है। तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जातियां व अनुसूचित जनजातियाँ (शैक्षणिक संस्थानों तथा राज्य सरकार के अधीन नियुक्तियों में आरक्षण) अधिनियम, 1993 को संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया था, इसके द्वारा तमिलनाडु की आरक्षण सीमा को 69% पर रखा गया है। हालाँकि इस कानून को न्यायिक जांच से होकर भी गुज़रना पड़ेगा।

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