आर्थिक विकास

मार्च, 2019 में मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स घटकर 52.6 पर पहुंचा

निक्केई इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अनुसार, भारत की विनिर्माण गतिविधियों में मार्च, 2019 में मंदी आई है, यह पिछले 6 महीने के न्यूनतम स्तर 52.6 पर पहुँच गया है।  इस सूचकांक में वृद्धि दर का 50 से ऊपर होना विस्तार को दर्शाता है।

पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI)

पीएमआई विनिर्माण और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में व्यापार गतिविधि का संकेतक है। यह एक सर्वेक्षण-आधारित सूचकांक मापन है, जो उत्तरदाताओं से उनके पिछले कुछ महीनों के महत्वपूर्ण व्यावसायिक बदलावों के बारे में जानकारी लेता है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए इसकी अलग से गणना की जाती है और फिर समग्र सूचकांक का निर्माण किया जाता है।

पीएमआई आमतौर पर महीने की शुरुआत में जारी किया जाता है, जो औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पर अधिकांश आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध कराता है। इसलिए, इसे आर्थिक गतिविधि के अच्छे अग्रणी संकेतक के रूप में माना जाता है। पीएमआई द्वारा मापा गया विनिर्माण विकास औद्योगिक उत्पादन का भी अच्छा संकेतक माना जाता है।

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जनवरी 2019 में औद्योगिक उत्पादन दर 1.7% रही

हाल ही में केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जनवरी माह का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी किया। इस सूचकांक के द्वारा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों जैसे खनन, विद्युत् तथा विनिर्माण इत्यादि में होने वाली वृद्धि के बारे में जानकारी मिलती है। इससे अर्थव्यवस्था में लघुकाल में होने वाले परिवर्तनों के बारे में जानकारी मिलती है।

मुख्य बिंदु

  • जनवरी, 2019 में में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक औद्योगिक उत्पादन की दर 1.7% रही। दिसम्बर, 2018 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 2.6% की दर से वृद्धि हुई थी।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में विनिर्माण क्षेत्र का भार 77.63% है। जनवरी, 2019 में विनिर्माण में 1.3% की दर से वृद्धि हुई।
  • जनवरी, 2019 में खनन क्षेत्र में 3.9% की वृद्धि दर्ज की गयी।
  • दिसम्बर, 2019 की अवधि में पूँजीगत वस्तुओं तथा उपभोक्ता वस्तुओं दोनों में ही गिरावट दर्ज की गयी।
  • प्राथमिक वस्तुओं के उत्पादन में 1.4% की वृद्धि हुई।
  • जनवरी, 2019 में अधोसंरचना/निर्माण वस्तुओं की विकास दर में जनवरी, 2018 के मुकाबले  7.9% की वृद्धि दर्ज की गयी।
  •  जनवरी 2018 के मुकाबले जनवरी 2019में विनिर्माण सेक्टर के 23 औद्योगिक समूहों में से 11 समूहों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गयी।
  • विद्युत् उत्पादन में 5.8% की वृद्धि दर्ज की गयी है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक  

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के द्वारा लघु काल में कुछ एक निश्चित औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का प्रकाशन केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन द्वारा प्रति माह किया जाता है।

सीएसओ ने आईआईपी के आधार वर्ष को मई 2017 में 2004-05 से 2011-12 में संशोधित किया था ताकि अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को हासिल किया जा सके और गुणवत्ता सूचकांकों को बेहतर बनाया जा सके।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में कुल 407 वस्तु समूह शामिल किये गए हैं, इसमें वस्तुओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है: विनिर्माण क्षेत्र में 405 वस्तुएं, उत्खनन और विद्युत में एक-एक वस्तु को शामिल किया गया है। इन तीनो वस्तु समूहों का भार 77.63%, 14.37% तथा 7.9% है।

केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन

सांख्यिकीय गतिविधियों के समन्वय एवं सांख्यिकीय मानकों के विकास एवं अनुरक्षण हेतु यह भारत का उत्तरदायी संगठन है। इस संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत्त कार्य करता है।

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