इंदिरा गाँधी

पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का निधन हुआ

हाल ही में पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का निधन 28 जुलाई, 2019 को हैदराबाद में हुआ। उन्होंने राजनीती की शुरुआत छात्र राजनीती से ओस्मानिया विश्वविद्यालय से की थी।

जयपाल रेड्डी

जयपाल रेड्डी का जन्म 16 जनवरी, 1942 को तेलंगाना के मद्गुल में हुआ था। वे 1970 के दशक में कांग्रेस के विधायक बने। इंदिरा गाँधी द्वारा आपातकाल लगाये जाने के बाद वे जनता पार्टी में शामिल हो गये। बाद में 1999 में वे पुनः कांग्रेस में शामिल हो गये। 2004 में उन्हें लोकसभा के लिए मिर्यालगुडा से लोकसभा के लिए निर्वाचित किया गया था। वे UPA-I तथा UPA-II सरकारों में केन्द्रीय मंत्री रहे। वे पांच बार लोकसभा तथा दो बार राज्यसभा के लिए चुने गये।

UPA की प्रथम सरकार वे केन्द्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री तथा शहरी विकास मंत्री रहे। UPA की दूसरी सरकार में वे 29 अक्टूबर, 2012 से 18 मई, 2014 तक केन्द्रीय विज्ञान व तकनीक मंत्री रहे।

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हरियाणा के मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने की घोषणा की

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए 5 लाख रूपए की वार्षिक वित्तीय स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने की घोषणा की है, इसका लाभ लोकतंत्र सेनानी अथवा उसके जीवनसाथी द्वारा सरकारी अथवा निजी अस्पताल में लिया जा सकता है।

लोकतंत्र सेनानी कौन हैं?

लोकतंत्र सेनानी वे लोग हैं जिन्हें 1975-77 के दौरान आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया था। मौजूदा समय में राज्य सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को प्रति माह 10,000 रुपये की पेंशन प्रदान की जाती है, इसके अलावा उन्हें हरियाणा रोडवेज के बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी दी जाती है।

1975-77 का आपातकाल

भारत में आपातकाल की शुरुआत 25 जून, 1975 को हुई थी, यह आपातकाल 21 महीने तक जारी रहा। इस आपातकाल का अंत 21 मार्च, 1977 को हुआ था।

तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की सलाह के बाद देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था, यह आपातकाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत लगाया गया था। आपातकाल की घोषणा के पश्चात् शासन का नियंत्रण प्रधानमंत्री के हाथ में आ गया, इस दौरान चुनाव निरस्त कर दिए गये और नागरिक स्वतंत्रता भी समाप्त कर दी गयी थी।

आपातकाल की अवधि के दौरान इंदिरा गाँधी के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को जेल में डाला गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गयी। इस दौरान मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामले भी सामने आये, इस अवधि में बड़े पैमाने पर ज़बरदस्ती लोगों की नसबंदी का अभियान भी चलाया गया था। आपातकाल भारतीय राजनीतिक इतिहास के सबसे विवादस्पद अवधियों में से एक है।

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