इज़राइल

हिजबुल्लाह को जर्मनी ने आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया

30 अप्रैल, 2020 को जर्मनी ने हिज़बुल्लाह नामक संगठन को आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया। जर्मन पुलिस के अनुसार, जर्मनी में 1,000 से अधिक लोग हिजबुल्लाह चरमपंथी विंग से सम्बंधित हैं।

हिजबुल्लाह

हिजबुल्लाह एक शिया इस्लामवादी राजनीतिक पार्टी है जो लेबनान में स्थित है। लेबनानी शिया समूहों को एकजुट करने के लिए 1980 के दशक में ईरानी प्रयास द्वारा इस संगठन की स्थापना की गई थी। ईरान-इजरायल के टकराव में, हिजबुल्लाह ईरान के लिए एक प्रॉक्सी के रूप में कार्य करता है।

1982 में, इज़राइल ने लेबनान पर आक्रमण किया और दक्षिण लेबनान की एक पट्टी पर कब्जा कर लिया। उस समय क्षेत्र में मुस्लिम मौलवियों द्वारा हिजबुल्लाह की स्थापना की गयी।

ईरान-इज़राइल छद्म युद्ध

ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष, यहूदी राज्य, इज़राइल को भंग करने के लिए ईरान का एक राजनीतिक संघर्ष है। यह संगठन 1979 में ईरानी क्रांति के दौरान इज़राइल के प्रति ईरान की दुश्मनी से उभरा। इसके बाद दक्षिण लेबनान संघर्ष के दौरान हिजबुल्लाह को ईरान का समर्थन मिला।

संयुक्त राष्ट्र

विश्व शांति के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सभी लेबनानी मिलिशिया को विघटित कर दिया था। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक हिजबुल्लाह समूह पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

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भारत और इजरायल ने 880 करोड़ रुपये के रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए

19 मार्च, 2020 को भारतीय सशस्त्र बलों ने इज़राइल हथियार उद्योग के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अनुसार भारत 880 करोड़ रुपये में 16,479 LMG (लाइट मशीन गन्स) की खरीद करेगा।

लाइट मशीनगन (LMG)

लाइट मशीन गन्स का उपयोग दस्ते के स्वचालित हथियारों के रूप में किया जाता है। LMG का उपयोग सबसे पहले द्वितीय विश्व युद्ध में किया गया था। इजरायल से खरीदे जाने वाली इन  लाइट मशीन गन्स का नाम ‘नेगेव’ है। नेगेव गैस संचालित एलएमजी है। यह हथियार महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीमावर्ती सैनिकों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। यह उन्हें आवश्यक युद्ध शक्ति प्रदान करेगा।

भारत-इज़राइल रक्षा संबंध

भारत के लिए इजरायल के रक्षा उद्योग हथियारों का एक उपयोगी स्रोत है। 2016 में, भारत ने इजरायल के साथ 600 मिलियन डालर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, इसके साथ ही इजराइल भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बन गया था। भारतीय वायु सेना में उपयोग किए जाने वाले हेरॉन ड्रोन्स को भारत ने इज़राइल से खरीदा था। 2017 में दोनों देशों ने 2 बिलियन डालर के एक और सौदे पर हस्ताक्षर किए थे।

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