इज़राइल

बेंजामिन नेतन्याहू ने इजराइल की संसद में शपथ ली

चुनावों में जीत के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने इजराइल की संसद में शपथ ली, उनके साथ नेसेट (इजराइल की संसद) के 120 सदस्यों ने भी शपथ ली। इजराइल के राष्ट्रपति रयूवेन रिवलिन ने बेंजामिन नेतन्याहू सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। राष्ट्रपति ने अपने वक्तव्य में कहा कि 120 सदस्यीय संसद में 65 सांसदों ने बेंजामिन नेतन्याहू को प्रधानमंत्री बनाये जाने की सिफारिश की है जबकि 45 सांसदों ने मुख्य प्रतिद्वंदी को बैनी गैंत्ज़ को प्रधानमंत्री बनाये जाने की सिफारिश की। जबकि अरब दलों के 10 सदस्यों ने किसी की भी सिफारिश नहीं की।

समीकरण

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को 65 सांसदों का समर्थन मिलने की उम्मीद है। उन्हें लिकुड (35 सीटें), शास (5 सीटें), यूनाइटेड टोरा जुडेइज्म (8 सीटें), दक्षिणपंथी दलों का संघ (5 सीटें), यिज़राएल बेयतेनु (5 सीटें) तथा कुलानु (4 सीटें) दल का समर्थन प्राप्त है।

विपक्ष में बैनी गैंत्ज़ की ब्लू एंड वाइट पार्टी (35 सीटें), लेबर (6 सीटें), हदाश ताल (6 सीटें), मेरेत्ज़ (4 सीटें) तथा राम बालाद (4 सीटें) इत्यादि दल शामिल हैं।

बेंजामिन पांचवीं बार इजराइल में सरकार बनाने की स्थिति में हैं। उनके पास सरकार के गठन के लिए 28 दिन का समय है, इस अवधि में राष्ट्रपति की विवेक शक्ति द्वारा दो सप्ताह की वृद्धि की जा सकती है।

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इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन को जुलाई के लिए स्थगित किया

इसरो ने मिशन चंद्रयान 2 को जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है, अब इस मिशन को संभवतः मध्य जुलाई में लांच किया जायेगा। इस मिशन को अब तक छठवीं बार स्थगित किया जा चुका है। दरअसल हाल ही में एक परीक्षण चन्द्रमा पर लैंड किये जाने वाले वाहन (लैंडर) “विक्रम” को हल्की सी क्षति पहुंची है।

हाल ही में इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर लैंड करने से पहले दुर्घटना का शिकार हुआ था और वह चन्द्रमा की सतह पर क्रेश होकर गिर गया था। इसके बाद इसरो ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी किस्म का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जायेगा।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है। यह डाटा पृथ्वी तक ऑर्बिटर के द्वारा भेजा जायेगा फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं।

 

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