इबोला

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहली बार COVID-19 पर बैठक का आयोजन करेगी

2 अप्रैल, 2020 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष डोमिनिकन रिपब्लिक ने घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अगले सप्ताह COVID-19 पर बैठक का आयोजन करेगी।

मुख्य बिंदु

इस बैठक का आयोजन टेलीकांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा। इस परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी भू-राजनीतिक शांति और सुरक्षा से निपटना है। COVID-19 पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता को लेकर इसकी आलोचना के बाद इस बैठकके आयोजन का निर्णय लिया गया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि 2014 में इबोला के समय इस परिषद ने तेजी से काम किया था।

इबोला के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

2014 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2177 अपनाया था, जिसमें दावा किया गया था कि अफ्रीका में इबोला का अभूतपूर्व प्रकोप “अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा” के लिए खतरा है। इस प्रस्ताव में देशों से तत्काल संसाधन और चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आग्रह किया गया था। यूएनएससी की इस पहल में कई सदस्य राष्ट्र शामिल थे और इससे कई लोगों की जान बचाने में मदद मिली।

वर्तमान परिदृश्य

वर्तमान में अमेरिका में कोरोना वायरस के मामलों की सबसे अधिक संख्या (2,13,372) है, जिसके बाद इटली में 1,10,574 मामले, स्पेन में 1,04,118, चीन में 82,361 मामले हैं। कोरोना वायरस के कारण अमेरिका में अब तक 4,600 लोगों की मौत हो चुकी है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में एबोला के कारण 1600 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इससे नार्थ किवू तथा इतुरी नामक दो प्रांत सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। यह इतिहास में इस प्रकार की पांचवी घोषणा है। इबोला वायरस के कारण अचानक बुखार, अत्याधिक कमजोरी, मांसपेशी में दर्द तथा गले में तकलीफ होती है। इसके पश्चात् व्यक्ति को उल्टी, डायरिया तथा बाद में व्यक्ति के शरीर से खून निकलने लगता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन

विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने वाली संस्था है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गयी थी। इसके 193 सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। इसका उद्देश्य विश्व के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में इसका मुख्यालय स्थित है। भारत भी इसका सदस्य देश है भारत की राजधानी दिल्ली में इसका भारतीय मुख्यालय स्थित है।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो एक अफ्रीकी देश है, पहले इस देश को जायरे नाम से भी जाना जाता था। क्षेत्रफल के आधार पर अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसकी राजधानी किंशासा में स्थित है। DR कांगो ने 30 जून, 1960 को बेल्जियम से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इसका कुल क्षेत्रफल 23,45,409 वर्ग किलोमीटर है।

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