इलेक्ट्रिक व्हीकल

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने बंगलुरु में “इनोवेटिंग फॉर क्लीन एयर” पहल लांच की

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने बंगलुरु में दो वर्षीय संयुक्त पहल लांच की है, इस पहल को “इनोवेटिंग फॉर क्लीन एयर” (स्वच्छ वायु के लिए नवाचार) नाम दिया गया है। इस पहल के तहत वायु की गुणवत्ता को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये जायेंगे, इसके लिए उपग्रह डाटा, सेंसर डाटा इत्यादि का उपयोग किया जायेगा।

“इनोवेटिंग फॉर क्लीन एयर” (स्वच्छ वायु के लिए नवाचार)

इस पहल के तहत उन नवाचार को चिन्हित किया जायेगा, जिससे वायु गुणवत्ता को सुधार जा सकता है।  इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग अधोसंरचना, नवीकरणीय उर्जा तथा कुशल ग्रिड प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम में इनोवेट यू.के. तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, एनजेन, प्रोजेक्ट लिथियम, भारतीय उद्योग संघ, C40 सिटीज तथा क्लीन एयर प्लेटफार्म अन्य साझेदार हैं। इसमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान बंगलौर, सिटीजन्स फॉर सस्टेनेबिलिटी, वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट, शक्ति फाउंडेशन, शैल टेक्नोलॉजी सेंटर, ग्लोबल बिज़नस इनरोड्स तथा इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम शामिल हैं।

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ई-व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए उठाये गये कदम

देश में ई-व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये मुख्य कदम निम्नलिखित हैं:

  • सरकार ने बैटरी ऑपरेटड ट्रांसपोर्ट व्हीकल तथा एथेनॉल व मेथनॉल इंधन पर चलने वाले वाहनों को परमिट लेने से छूट दी है।
  • भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय ने FAME (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चर ऑफ़ (हाइब्रिड) इलेक्ट्रिक व्हीकल) लांच किया है, इसके द्वारा देश में पर्यावरण से मैत्रीपूर्ण इलेक्ट्रिक व्हीकल तथा हाइब्रिड व्हीकल के उत्पादन को देश में बढ़ावा दिया जायेगा।
  • देश में चार्जिंग से सम्बंधित अधोसंरचना के विकास के लिए उर्जा मंत्रालय ने नीति वक्तव्य जारी किया है तथा एक अधिसूचना भी जारी की है। इस अधिसूचना के अनुसार विद्युत् वाहनों को चार्ज करना एक सेवा होगी न कि विद्युत् का विक्रय।
  • भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने स्वदेशी रूप से निर्मित लिथियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी के वाणिज्यीकरण को सहमती दे दी है, इस तकनीक के हस्तांतरण के लिए 14 कंपनियों को चिन्हित किया गया है।
  • केन्द्रीय आवास व शहरी मामले मंत्रालय ने शहरी व क्षेत्रीय विकास योजना निर्माण व क्रियान्वयन दिशानिर्देशों में संशोधन करके विद्युत् वाहनों के लिए निजी व वाणिज्यिक भवनों में चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध करवाने के लिए कहा है।

भारत सरकार ने 2030 तक विद्युत् वाहनों का उपयोग बड़े पैमाने पर करने का लक्ष्य रखा है।

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