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इसरो तमिलनाडु में SSLV के लिए दूसरा लांच पोर्ट स्थापित करेगा

इसरो दक्षिण तमिलनाडु में तूतिकोड़ी में दूसरा लांच पोर्ट स्थापित करेगा। इसके लिए तमिलनाडु सरकार लगभग 2300 एकड़ भूमि की व्यवस्था करेगी। इस नए पोर्ट से स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल (SSLV) लांच किये जायेंगे। SSLV की सहायता से 500 किलोग्राम तक के पेलोड को अन्तरिक्ष में ले जाया जा सकता है।

स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल

छोटे सैटेलाइट्स को कम लागत पर लांच करने के लिए SSLV (स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल) विकसित कर रहा है। SSLV से छोटे सैटेलाइट्स को लांच करने के लगने वाले समय व लागत में कमी आएगी। वर्तमान समय में छोटे सैटेलाइट्स के लांच का ट्रेंड काफी प्रचलन में है। वर्तमान में इसरो छोटे सैटेलाइट्स को बड़े सैटेलाइट्स के साथ PSLV और GSLV जैसे बड़े लांच व्हीकल में ही लांच करता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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मिशन गगनयान के लिए चार अन्तरिक्षयात्रियों का चयन किया गया

हाल ही में मिशन गगनयान के लिए भारतीय वायुसेना से चार लोगों को चुना गया है। इन वायुसेना के जवानों को रूस में अंतरिक्षयात्रियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। गगनयान मिशन के तहत भारत पहली बार अन्तरिक्षयात्रियों को 2022 में अन्तरिक्ष में भेजेगा।

मिशन गगनयान

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने मिशन गगनयान के लिए दिसम्बर, 2021 को डेडलाइन निश्चित की है। गगनयान के लिए अन्तरिक्षयात्रियों का शुरूआती प्रशिक्षण भारत में ही किया जायेगा, बाद में एडवांस्ड प्रशिक्षण रूस में भी किया जा सकता है। हाल ही में केन्द्रीय कैबिनेट ने मिशन गगनयान के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी थी। इस मिशन में तीन अन्तरिक्षयात्रियों को अन्तरिक्ष में 5-7 दिनों के लिए अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। भारत ऐसा कारनामा करने वाला चौथा देश बनेगा

मिशन के मुख्य बिंदु

गगनयान मिशन की लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये आएगी। यह मिशन पूर्ण रूप से स्वदेशी होगा। इस मिशन के वास्तविक लांच से पहले इसरो बिना मानव के दो मिशन लांच करेगा, पहला मिशन 30 महीने में तथा दूसरा मिशन 36 महीने बाद लांच किया जायेगा।

चरण

गगनयान मिशन के लिए GLSV Mk-III लांच व्हीकल का उपयोग किया जायेगा। मिशन गगनयान के स्पेस क्राफ्ट में एक क्रू मोड्यूल तथा एक सर्विस मोड्यूल होगा। इसका भार लगभग 7 टन होगा। इस मिशन में तीन अन्तरिक्ष यात्रियों को 5-7 दिन के लिए अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। इस स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की कक्षा में 300-400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जायेगा। क्रू मोड्यूल का आकार 3.7 मीटर तथा सर्विस मोड्यूल का आकार 7 मीटर होगा।

परिक्रमा

इस मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से लांच किया जायेगा। यह स्पेसक्राफ्ट 16 मिनट में अपेक्षित ऊंचाई पर पहुँच जायेगा। इस मिशन के लिए क्रू का चयन भारतीय वायुसेना व इसरो द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। बाद में इस क्रू को 2-3साल तक प्रशिक्षण दिया जायेगा।

वापसी

वापसी के लिए मोड्यूल के वेग को कम किया जाएगा और इसे विपरीत दिशा में घुमाया जायेगा। जब यह पूरा मोड्यूल पृथ्वी की सतह से 120 किलोमीटर की दूरी पर पहुंचेगा तो सर्विस मोड्यूल को अलग किया जायेगा। केवल क्रू वाला मोड्यूल ही पृथ्वी पर पहुंचेगा। इसे पृथ्वी पर पहुँचने में लगभग 36 मिनट लगेंगे। इसरो क्रू मोड्यूल को गुजरात के निकट अरब सागर अथवा गुजरात की खाड़ी में लैंड करवाने की योजना बना रहा है।

इस मिशन को भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस से लगभग 6 महीने पहले क्रियान्वित किया जायेगा।

गगनयान के लिए इसरो द्वारा विकसित तकनीक

इसरो अन्तरिक्ष में मानव भेजने के लिए महत्वपूण तकनीकों का परिक्षण कर रहा है। इस मिशन को 10,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जायेगा। इसके लिए कई उपकरण तैयार किये जा चुके हैं। इसके लिए हैवी लिफ्ट लांच व्हीकल GSLV मार्क-III, रिकवरी टेक्नोलॉजी, क्रू मोड्यूल, अन्तरिक्ष यात्री प्रशिक्षण व्यवस्था, वातावरण नियंत्रण तथा लाइफ सपोर्ट सिस्टम का सफलतापूर्वक निर्माण कर लिया गया है। दिसम्बर, 2014 में GSLV मार्क-III का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। इसके बाद जून 2017 में GSLV मार्क-III की पहली डेवलपमेंटल उड़ान सफलतापूर्वक भरी थी। जुलाई, 2018 में क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया था। अभी भी कुछ एक टेक्नोलॉजी व उपकरणों का निर्माण किया जाना बाकी है।

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