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इसरो का लिथियम-आयन टेक्नोलॉजी हस्तांतरण

इसरो ने लिथियम आयन टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के लिए 10 कंपनियों का चयन किया है। इन कंपनियों का चयन “रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन” के परीक्षण के बाद किया गया है।

टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के लिए चुनी गयी कंपनियां

अमर राजा बैटरीज लिमिटेड, चित्तूर

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, पुणे

कार्बोरंडम यूनिवर्सल लिमिटेड, गुरुग्राम

GOCL कारपोरेशन लिमिटेड, हैदराबाद

ज्योति CNC ऑटोमेशन लिमिटेड, राजकोट

नेशनल एल्युमीनियम को. लिमिटेड, भुबनेश्वर

सुखबीर एग्रो एनर्जी लिमिटेड, नई दिल्ली

टाटा केमिकल्स लिमिटेड, मुंबई

थरमैक्स लिमिटेड, पुणे

मुख्य तथ्य

इसरो की रॉकेट साइंस शाखा विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) ने लिथियम आयन सेल प्रौद्योगिकी को सफल भारतीय उद्योगों और स्टार्ट-अप के लिए स्थानांतरित करने का फैसला किया है। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी विद्युत वाहन (EV) उद्योग के विकास में तेजी लाना और आयातित लिथियम आयन बैटरी प्रौद्योगिकी की निर्भरता को कम करना है।

इस संबंध में, वीएसएससी ने मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिथियम आयन सेलों की एक श्रृंखला का उत्पादन करने हेतु कई योग्य कंपनियों और स्टार्ट-अप को अपनी पावर स्टोरेज तकनीक का उपयोग करने के लिए RFQ (request for quotation) जारी किया था। इसरो द्वारा की जाने वाली तकनीक हस्तांतरण देश में उत्पादन सुविधाओं की स्थापना करने में मदद करेगी जिससे विभिन्न आकार, क्षमता, ऊर्जा घनत्व और बिजली घनत्व की बैटरियों का उत्पादन किया जा सकता है। वर्तमान घरेलू मांग में से अधिकांश चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान से आयातित बैटरी द्वारा पूरी की जाती है। लीथियम आयन सेल उत्पादन की यह पहल, केंद्र सरकार की योजना 2030 तक देश में 100% विद्युत वाहन हासिल करने का हिस्सा है।

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इसरो ने कलामसैट V2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने हाल ही में कलामसैट-V2 को श्रीहरिकोटा अन्तरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लांच किया।

कलामसैट-V2

  • कलामसैट-V2 का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति व वैज्ञानिक अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है, इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
  • यह अब तक का सबसे हल्का सैटेलाइट है।
  • यह एक प्रकार का संचार उपग्रह है, इसका उपयोग रेडियो ट्रांसमिशन तथा वायरलेस कम्युनिकेशन के लिए किया जायेगा।
  • इस सैटेलाइट को बनाने में केवल 12 लाख रुपये का खर्च आया है, इसका निर्माण चेन्नई बेस्ड अन्तरिक्ष शिक्षा फर्म “स्पेस किड्ज इंडिया” के छात्रों द्वारा 6 दिनों में किया गया।
  • इसका जीवनकाल केवल दो माह है।
  • इस सैटेलाइट को PSLV द्वारा लांच किया गया।

प्रयोग

PSLV  चार चरणों वाला राकेट है, इस लांच के दौरान इसरो ने राकेट की डेड स्टेज (मृत चरण) को रिकवर करने का प्रयास किया। आमतौर पर PSLV के तीन चरण अपना काम करने के बाद पुनः पृथ्वी पर गिर जाते हैं। जबकि चौथे चरण को कोई बार रोका व शुरू किया जाता है, इसकी सहायता से स्पेसक्राफ्ट को उचित कक्षा में स्थापित किया जाता है। इसरो ने इस चौथे चरण को प्रयोग करने के लिए एक ऑर्बिटल प्लेटफार्म में परिवर्तित किया। इस प्लेटफार्म पर लगभग शून्य गुरुत्वाकर्षण परिवेश में प्रयोग किया जायेंगे। इसरो ने राकेट के मृत चरण को क्रियाशील रखने  का प्रयास पहली बार किया है।

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