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इसरो ने किया मिशन चंद्रयान-2 जनवरी 2019 तक स्थगित

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 मिशन को जनवरी, 2019 के लिए स्थगित कर दिया है। इस मिशन को दूसरी बार स्थगित किया गया है। पहले इस मिशन को अप्रैल 2018 में लांच किया जाना था, बाद में लांच की तिथि अक्टूबर, 2018 निश्चित की गयी थी।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जायेगा।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है। यह डाटा पृथ्वी तक ऑर्बिटर के द्वारा भेजा जायेगा फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

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इसरो ने सैटेलाइट असेम्बल करने के लिए तीन निजी कंपनियों से किया अनुबंध

यू.आर. राव सैटेलाइट सेण्टर (URSC), इसरो के नोडल सैटेलाइट डिवीज़न तीन निजी कंपनियों के साथ स्पेसक्राफ्ट असेम्बली इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग (AIT) के कार्य को आउटसोर्स करने के लिए अनुबंध (contract) किया। यह अनुबंध अल्फा डिजाईन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और इसके समूह के 6 सदस्य, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड हैदराबाद के साथ किया गया।

मुख्य बिंदु

इस अनुबंध का मुख्य लक्ष्य स्पेसक्राफ्ट असेम्बली, एकीकरण और परीक्षण जैसे कार्यों में भारतीय स्पेसक्राफ्ट उद्योग को शामिल करना है। यह तीनों फर्म इसरो के URSC के साथ मिलकर हर साल 3 छोटे से मध्यम आकार के सैटेलाइट का निर्माण करेंगी,  इस प्रकार जुलाई 2021 कुल मिलाकर 27 सैटेलाइट निर्मित किये जायेंगे। प्रत्येक फर्म से 50 सदस्य URSC के इंजिनियरों के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे।

यू.आर. राव सैटेलाइट केंद्र (URSC)

URSC को पहले इसरो सैटेलाइट केंद्र कहा जाता था, इसका नाम अप्रैल, 2018 में डॉ. उडुपी रामचंद्र राव के नाम पर रखा गया। डॉ. यू.आर. राव इसरो के भूतपूर्व चेयरमैन तथा ISAC के संस्थापक निदेशक थे। URSC सभी भारतीय उपग्रहों के डिजाईन, विकास व टेस्टिंग के लिए इसरो का नोडल केंद्र है।  इसकी स्थापना 1972 में की गयी थी, यह कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित है। URSC ने आज तक वैज्ञानिक, संचार, नौसंचालन तथा रिमोट सेंसिंग के लिए 100 से अधिक सैटेलाइट निर्मित किये हैं।

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