ईरान

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स हिंद महासागर में स्थायी बेस स्थापित करेगा

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने घोषणा की है कि वह अगले साल मार्च तक हिंद महासागर में अपना स्थायी सैन्य अड्डा स्थापित करेगा। यह घोषणा 23 जून, 2020 को एलिरेज़ा तंगसिरी द्वारा की गयी। एलिरेज़ा तंगसिरी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसेना कमांडर है।

नेवी कमांडर ने जानकारी दी कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निर्देशों के अनुसार हिंद महासागर में स्थायी सैन्य ठिकाना स्थापित करने का कदम उठाया जा रहा है।

इस्लामिक रेवोलुशनरी गार्ड कॉर्प्स

इस्लामिक रेवोलुशनरी गार्ड कॉर्प्स ईरान के सशस्त्र बल की एक शाखा है, इसकी स्थापना 1979 की क्रांति के बाद 22 अप्रैल, 1979 को की गयी थी। इसकी स्थापना अयातुल्ला खोमीनी के आदेश पर की गयी थी। ईरान के संविधान के अनुसार इस्लामिक रेवोलुशनरी गार्ड कॉर्प्स का कार्य विदेशी हस्तक्षेप से इस्लामिक प्रणाली की सुरक्षा करना है। वर्तमान में इस्लामिक रेवोलुशनरी गार्ड कॉर्प्स में 1,20,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत्त हैं। इसे सऊदी अरब, बहरीन तथा अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , ,

ईरान ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए नई मुद्रा की शुरुआत

ईरान सरकार हाल ही में अपनी मुद्रा का नाम बदलकर टोमन करने के निर्णय लिया है। ईरानी मुद्रा की इकाई रियाल है। ईरानी सरकार के अनुसार, एक टोमन 10,000 रियाल से मिलकर बनता है।

मुख्य बिंदु

घेरन एक अन्य मुद्रा इकाई है। 100 घेरन से एक टोमन बनता है। नई प्रणाली को हाल ही में ईरानी संसद द्वारा देश में उच्च मुद्रास्फीति का प्रबंधन करने के लिए अधिकृत किया गया है। टोमन बनाने के लिए, पुराने करेंसी नोटों में से चार शून्य को हटा दिया गया है। रियाल अभी भी वैध रहेगा।

मुद्रा का अवमूल्यन

ईरानी मुद्रा को चार प्रमुख बिंदुओं के दौरान अवमूल्यन का सामना करना पड़ा  :

  • 1979 की इस्लामिक क्रांति। 1979 में पश्चिम-समर्थित शाह की सरकार गिरने के बाद कई उद्यमी और कारोबारी दिग्गज देश छोड़कर चले गए थे।
  • 1989 में ईरान-इराक युद्ध का अंत। युद्ध समाप्त होने के बाद, ईरान को अपनी बिखरती अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में 8 साल लग गए। इस समय के दौरान डॉलर के मुकाबले रियाल का मूल्य लगभग 100% कम हो गया था।
  • राष्ट्रपति अहमदीनेजाद का कार्यकाल। उनके शासनकाल के दौरान ईरान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। इस दौरान वैश्विक बाजार में रियाल ने अपना 400% मूल्य खो दिया था। 2013 में अहमदीनेजाद ने अपनी सत्ता छोड़ दी।
  • अमेरिका का परमाणु समझौते से अलग होना। यह ईरानी मुद्रा के लिए सबसे भारी झटका था। इसके कारण ईरान की मुद्रा अमेरिकी डॉलर की तुलना में 600% कमजोर हो गई।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , , , ,

Advertisement