ईरान

ईरान ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए नई मुद्रा की शुरुआत

ईरान सरकार हाल ही में अपनी मुद्रा का नाम बदलकर टोमन करने के निर्णय लिया है। ईरानी मुद्रा की इकाई रियाल है। ईरानी सरकार के अनुसार, एक टोमन 10,000 रियाल से मिलकर बनता है।

मुख्य बिंदु

घेरन एक अन्य मुद्रा इकाई है। 100 घेरन से एक टोमन बनता है। नई प्रणाली को हाल ही में ईरानी संसद द्वारा देश में उच्च मुद्रास्फीति का प्रबंधन करने के लिए अधिकृत किया गया है। टोमन बनाने के लिए, पुराने करेंसी नोटों में से चार शून्य को हटा दिया गया है। रियाल अभी भी वैध रहेगा।

मुद्रा का अवमूल्यन

ईरानी मुद्रा को चार प्रमुख बिंदुओं के दौरान अवमूल्यन का सामना करना पड़ा  :

  • 1979 की इस्लामिक क्रांति। 1979 में पश्चिम-समर्थित शाह की सरकार गिरने के बाद कई उद्यमी और कारोबारी दिग्गज देश छोड़कर चले गए थे।
  • 1989 में ईरान-इराक युद्ध का अंत। युद्ध समाप्त होने के बाद, ईरान को अपनी बिखरती अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में 8 साल लग गए। इस समय के दौरान डॉलर के मुकाबले रियाल का मूल्य लगभग 100% कम हो गया था।
  • राष्ट्रपति अहमदीनेजाद का कार्यकाल। उनके शासनकाल के दौरान ईरान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। इस दौरान वैश्विक बाजार में रियाल ने अपना 400% मूल्य खो दिया था। 2013 में अहमदीनेजाद ने अपनी सत्ता छोड़ दी।
  • अमेरिका का परमाणु समझौते से अलग होना। यह ईरानी मुद्रा के लिए सबसे भारी झटका था। इसके कारण ईरान की मुद्रा अमेरिकी डॉलर की तुलना में 600% कमजोर हो गई।

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अमेरिका ने ईरान पर लगाये गये चार परमाणु प्रतिबंधों को रीन्यू किया

30 मार्च, 2020 को अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए चार परमाणु प्रतिबंधों को रीन्यू किया। ईरान पर परमाणु कार्यक्रम के निर्माण को रोकने के लिए यह प्रतिबंध लगाए गए थे।

मुख्य बिन्दु

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए परमाणु प्रतिबंधों को अगले 60 दिनों के लिए रीन्यू किया गया है। COVID​​-19 के खतरे के बीच ईरान के लिए परमाणु कार्यक्रम पर काम करना मुश्किल हो गया है।

अमेरिका-ईरान

2015 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, ईरान के अधिकांश यूरेनियम को देश से बाहर भेज दिया गया था। ईरान के कई कार्यशील न्यूक्लियर ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के तहत लाया गया था। इसके अलावा  एक भारी जल सुविधा को निष्क्रिय कर दिया गया था।

भारत पर प्रभाव

ईरान में व्यापार करने के प्रतिबंध और बाधाएं भारत के तेल आयात को प्रभावित कर सकते हैं। जब अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल आयात में कटौती करने के लिए इसी तरह से दबाव डाला था, तब भारत का तेल व्यापार बहुत प्रभावित हुआ था।

इसके अलावा  भारत की चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंचने की बड़ी योजना है, जिसे भारत ईरान में विकसित कर रहा है। इन प्रतिबंधों भारत की चाबहार योजना पर भी काफी असर पड़ेगा।

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