उत्तर-पूर्व

उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे के “प्लान बी” ने जीता बेस्ट इनोवेशन अवार्ड

उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे द्वारा शुरू की गयी पहल “प्लान बी” ने भारतीय रेलवे में “बेस्ट इनोवेशन अवार्ड” जीता है। यह पुरस्कार भारतीय रेलवे द्वारा प्रदान किया जाता है, इस पुरस्कार के विजेता को प्रशस्ति पत्र तथा 3 लाख रुपये इनामस्वरुप प्रदान किये जाते हैं।

मुख्य बिंदु

“प्लान बी” के तहत रेलवे ट्रैक से जंगली हाथियों को दूर रखने के लिए एक डिवाइस से मधुमक्खियों की आवाज़ निकाली जाती है। इस डिवाइस से निकलने वाली आवाज़ 700-800 मीटर तक सुनी जा सकती है। इस प्रकार के प्रथम उपकरण का उपयोग असम के गुवाहाटी के निकट रानी रिज़र्व फारेस्ट में किया गया था। अब तक उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे ने ऐसी 46 डिवाइसेस की स्थापना कर ली है। यह डिवाइस रेलवे ट्रैक से हाथियों के झुण्ड को दूर करने में बेहद कारगर है। उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे के अधिकारियों के अनुसार “प्लान बी” की वजह से 2014 से जून, 2019 तक 1,014 हाथियों की जान बचायी जा चुकी है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा में विकास कार्यों का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने त्रिपुरा यात्रा के दौरान कई विकास कायों का उद्घाटन किया, इनमे में से प्रमुख परियोजनाएं निम्नलिखित हैं :

  • दक्षिणी त्रिपुरा में 23.32 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक। इस 23 किलोमीटर लम्बे गरजे-बेलोनिया सेक्शन का निर्माण 400 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह 3,407 करोड़ रुपये के अगरतला-सबरूम (115 किलोमीटर) राष्ट्रीय रेलवे परियोजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य दक्षिणी त्रिपुरा के अंतिम सीमान्त कस्बे सबरूम को लिंक करना है।
  • इससे वस्तुओं व यात्रियों के परिवहन में काफी लाभ होगा।
  • नरसिंहगढ़ में त्रिपुरा टेक्नोलॉजी संस्थान के नए कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया। इस नए कॉम्प्लेक्स का निर्माण 103 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इस लागत का वहन केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार ने किया।
  • इस दौरान अगरतला हवाईअड्डे में त्रिपुरा के अंतिम शासक महाराज वीर विक्रम किशोर माणिक्य की मूर्ती का अनावरण भी किया गया।

महाराजा वीर विक्रम किशोर माणिक्य

महाराजा वीर विक्रम किशोर माणिक्य का शासनकाल 1923 से 1947 तक रहा। उन्हें त्रिपुरा में आधुनिक वास्तुकला का जनक कहा जाता है। वर्तमान त्रिपुरा की योजना का आरम्भ उनके शासनकाल में शुरू हुआ था।

1939 में महाराजा ने त्रिपुरा की स्थानीय जनजातियों के लिए भूमि आरक्षित की, जो बाद में त्रिपुरा स्वायत्त जिला परिषद् के निर्माण में महत्वपर्ण सिद्ध हुई।

उन्हें अगरतला में त्रिपुरा के पहले हवाईअड्डे के निर्माण का श्रेय दिया जाता है जो कि वर्तमान में उत्तर-पूर्व दूसरा सबसे व्यस्त हवाईअड्डा है।

महाराजा वीर विक्रम किशोर माणिक्य की मूर्ती का निर्माण त्रिपुरा सरकार के कला व शिल्प महाविद्यालय ने 5 लाख रुपये की लागत में किया गया है।

इस मूर्ती का अनावरण केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है जिसके तहत राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले छुपे हुए नायकों को सम्मानित किया जायेगा।

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