उत्तर प्रदेश

रक्षा उत्पादन को बढ़ाने के लिए तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश रक्षा में भूमि अधिग्रहण किया गया

23 मार्च, 2020 को रक्षा मंत्रालय ने संसद में घोषणा की कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की राज्य सरकारों से भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है। चूंकि भूमि राज्य का विषय है, इसलिए विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र के लिए राज्य सरकार से भूमि का अधिग्रहण करना महत्वपूर्ण है।

मुख्य बिंदु

भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में रक्षा निर्यात को 5 बिलियन अमरीकी डालर तक बढ़ाने की योजना बनाई है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार अपने निवेश के अवसरों का विस्तार कर रही है। रक्षा उत्पादन के लिए तमिलनाडु में 1,182 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 1,537 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

रक्षा विनिर्माण में नीतिगत पहलें

रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने कई पहलें शुरू की हैं। कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:

“रणनीतिक साझेदारी” मॉडल प्रस्तुत किया गया है, इसके तहत निर्माता कंपनी को भारतीय संस्थाओं के साथ साझेदारी करनी होगी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करनी होंगी।

रक्षा क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति को संशोधित किया गया है, अब सरकारी मार्ग के माध्यम से 100% निवेश की अनुमति है।

निवेश से संबंधित मुद्दों और इसके संबंधित नियामक उपायों के लिए डिफेंस इन्वेस्टर सेल का निर्माण किया गया है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए अध्यादेश पारित किया

16 मार्च, 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार ने  “सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली अध्यादेश, 2020” अध्यादेश पारित किया। इस अध्यादेश का उद्देश्य हिंसक कृत्यों से निपटना है। इसके द्वारा सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली करने में मदद मिलेगी।

अनुच्छेद 213

किसी राज्य के राज्यपाल के पास अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश पारित करने की शक्तियां होती हैं। इस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। अध्यादेश को तभी लागू किया जा सकता है जब विधान सभा और विधान परिषद दोनों सत्र में न हों।

राज्यपाल के पास अध्यादेश वापस लेने की शक्तियां भी हैं। अध्यादेश पारित होने के बाद अध्यादेश को विधान सभा द्वारा पारित किया जाना चाहिए। यदि इसे विधानसभा में पारित नहीं किया जाता है, तो अध्यादेश के शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर अध्यादेश का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

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