उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

दिसम्बर 2019 में मुद्रास्फीति दर पांच वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंची

सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा 13 जनवरी, 2020 को जारी डाटा के अनुसार दिसम्बर, 2019 खाद्य मुद्रास्फीति 14.12% रही। इस दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बढ़कर 7.35% पर पहुँच गया। मुद्रास्फीति में वृद्धि होने का प्रमुख कारण सब्जियों के दाम में होने वाली वृद्धि है।

मुख्य बिंदु

दिसम्बर, 2018 खाद्य मुद्रास्फीति की दर -2.65% थी। शहरी क्षेत्रों में सब्जियों की महंगाई 75% से भी अधिक बढ़ गयी थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 53% तक पहुँच गयी थी। नवम्बर में प्याज की कीमतों में 128% वृद्धि हुई थी, जबकि दिसम्बर में यह दर 328% पर पहुँच गयी।

विश्लेषण

मुद्रास्फीति में वृद्धि का एक बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच तल्ख़ सम्बन्ध है जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। आने वाले बजट में भारत सरकार करों में कटौती कर सकती है, इसके अलावा भारत सरकार अधोसंरचना पर अधिक व्यय कर सकती है।

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खुदरा महंगाई दर फरवरी, 2018 में 4.44 फीसदी रही

-केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने फरवरी, 2018 के लिए उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े भी जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर 3.62 फीसदी (अनंतिम) रही, जो फरवरी 2017 में 2.01 थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर फरवरी, 2018 में 2.45 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई, जो फरवरी 2017 में 1.87 फीसदी थी। ये दरें जनवरी, 2018 में क्रमशः 5.05 तथा 4.06 फीसदी (अंतिम) थीं।

-शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर फरवरी, 2018 में 4.44 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई है, जो फरवरी, 2017 में 3.65 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीपीआई पर आधारित महंगाई दर जनवरी, 2018 में 5.07 फीसदी (अंतिम) थी। इसी तरह यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर फरवरी, 2018 में 3.26 फीसदी (अनंतिम) रही है, जो फरवरी, 2017 में 2.01 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीएफपीआई पर आधारित महंगाई दर जनवरी, 2018 में 4.70 फीसदी (अंतिम) थी।

-सांख्‍यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्‍वयन मंत्रालय के केन्‍द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) के लिए आधार वर्ष को 2010=100 से संशोधित करके 2012=100 कर दिया है।

जिस कीमत पर उपभोक्ताओं को वस्तुएं या सेवाएं प्राप्त होती हैं, उसे ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) कहते हैं। केंद्रीय एजेंसी कीमतों के मामले में कई सूचकांक की गणना करती हैं, जिनमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) भी एक है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के कई उपयोग होते हैं। इसका उपयोग तनख्वाह और महंगाई भत्तों के निर्धारण के साथ ही यह देखने के लिए भी किया जा सकता है कि देश के लोगों पर महंगाई का बोझ कितना है। इससे इस बात का अनुमान भी लगाया जा सकता है कि महंगाई किस क्षेत्र में ज्यादा बढ़ रही है।

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