एथेनॉल

जैव उर्जा पर भारत-ब्राज़ील MoU को कैबिनेट ने मंज़ूरी दी

केन्द्रीय कैबिनेट ने भारत-ब्राज़ील MoU को मंज़ूरी दे दी है। वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने नवीकरणीय उर्जा के क्षेत्र में शोध व विकास को सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सहमती व्यक्त की थी। इसके बाद दोनों देशों ने MoU पर हस्ताक्षर किये थे।

भारत-ब्राज़ील उर्जा मांग

लैटिन अमेरिका व कॅरीबीयन क्षेत्र में ब्राज़ील भारत का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। दोनों देश विश्व के सबसे बड़े उर्जा उपभोक्ता देशों में से है। वर्तमान समय में ब्राज़ील विश्व का दूसरा सबसे बड़ा जैव इंधन उत्पादक व उपभोक्ता देश है।

भारत ने 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने तहत डीजल में 5% बायोडीजल मिश्रित करने का लक्ष्य रखा है।

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राष्ट्रीय जैव इंधन नीति की क्रियान्वयन अपडेट्स

केन्द्रीय पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जून, 2018 में राष्ट्रीय जैव इंधन नीति के सन्दर्भ में अधिसूचना जारी की थी। 18 नवम्बर, 2018 को केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस नीति के क्रियान्वयन के सन्दर्भ में लोकसभा में लिखित जवाब दिया है।

सरकार द्वारा उठाये गये कदम तथा उपलब्धियां

  • 2013-14 में पेट्रोल में 1.53% एथेनॉल मिलाया जाता था, 2017-18 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की दर 4.22% कर दी गयी है।
  • 2018-19 के लिए भारत सरकार ने निर्धारित 225 करोड़ रुपये लीटर के मुकाबले अभी तक 180 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद की है।
  • देश की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 335 करोड़ लीटर है।

जैव इंधन पर मौजूदा सरकारी योजनायें

  • Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation स्कीम के तहत देश भर में 2023 तक 5000 संपीडित बायो गैस प्लांट्स की स्थापना की जाएगी।
  • एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम में शामिल तेल मार्केटिंग कंपनियां अधिकतम 10% मिश्रित एथेनॉल के साथ पेट्रोल बेच सकती हैं।

राष्ट्रीय जैव इंधन नीति, 2018

इस नीति में जैव इंधन को प्रथम पीढ़ी (1G), द्वितीय पीढ़ी (2G) और तृतीय पीढ़ी (3G) में विभाजित किया गया है। इसमें प्रत्येक श्रेणी को उचित वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को अतिरिक्त स्टॉक से लाभदायक तरीके से निजात दिलाना और देश के तेल के आयात को कम करना है। इसके लिए सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल की नयी श्रेणी को अनुमति दी, इसमें प्रमुख फसलें हैं : गन्ना रस, मक्की, कसावा तथा अन्य स्टार्च युक्त अन्न जिसका उपयोग मानव उपभोग के लिए नहीं किया जा सकता।

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