एथेनॉल

इंडियन आयल पानीपत में करेगा 2G एथेनॉल प्लांट की स्थापना

हरियाणा के पानीपत में 2G एथेनॉल प्लांट की स्थापना के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने इंडियन आयल कारपोरेशन को क्लीयरेंस दे दी है। इंडिया आयल इस प्लांट की स्थापना के लिए 766 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।

इस प्लांट में उप्तादित किये जाने वाले एथेनॉल को परिवहन इंधन में मिलाया जायेगा। इस परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना है।

केंद्र सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम करने के लिए काफी प्रयास कर रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करके स्पष्ट किया था कि गन्ने के रस से एथेनॉल के उत्पादन के लिए शुगर मिलों को पर्यावरणीय क्लीयरेंस की ज़रुरत नहीं है।

भारत में एथेनॉल

भारत में 2003 में एथेनॉल को इंधन के रूप में उपयोग किये जाने की शुरुआत हुई। शुरू में E5 इंधन में 95% डीजल तथा 5% एथेनॉल मिलाया जाता था। 2006 में भारत ने E10 जैव इंधन का दूसरा चरण शुरू किया, इस चरण में 90% डीजल तथा 10% एथेनॉल तथा 90% डीजल मिलाया जाता है। भारत को अभी E15 औपचारिक रूप से लांच करना बाकी है। गौरतलब है कि कई देश E100 तक लांच कर चुके हैं।

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हरियाणा सरकार ने एथेनॉल प्लांट के लिए इंडियन आयल कारपोरेशन के साथ MoU पर किये हस्ताक्षर

11 सितम्बर, 2018 को हरियाणा सरकार ने इंडियन आयल कारपोरेशन के साथ पानीपत में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये। इस एथेनॉल प्लांट को 900 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जायेगा।

मुख्य बिंदु

इस प्लांट की क्षमता 100 किलोलीटर प्रति दिन होगी, इसमें फसल के अवशेष उपयोग किया जायेगा। राज्य का कृषि व किसान कल्याण विभाग प्लांट के 50 किलोमीटर के दायरे में किसानों को फसल अवशेष प्लांट को प्रदान करने के लिए प्रेरित करेगा। इस प्लांट को किसानों से मुख्यतः धान और गन्ने की फसल के अवशेष प्राप्त होंगे। इसके अलावा 10 कोआपरेटिव और 3 निजी चीनी मिलों द्वारा भी इस प्लांट को कच्चा माल उपलब्ध करवाया जायेगा। यह समझौता एक वर्ष के लिए वैध है। इससे किसानों को फसल के अवशेष को जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और प्रदूषण में भी कमी होगी।

बायो-एथेनॉल

बायो-एथेनॉल के प्रकार का अल्कोहल है जिसे फसल अवशेष के किण्वन द्वारा प्राप्त किया जाता है। इसे पेट्रोल और डीजल में मिलाया जाता है, इससे जीवाश्म इंधन से होने वाले उत्सर्जन में कमी आएगी। और इंधन के लिए विदेशों पर भारत की निर्भरता में भी कमी होगी। यह किसानों के लिए भी लाभदायक है, उन्हें कच्चा माल उपलब्ध से आय की प्राप्ति भी होगी।

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