ओजोन परत

ओजोन परत का सबसे बड़ा छिद्र स्वतः बंद हुआ

C3S (कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस) और CAMS (कोपरनिकस एटमॉस्फियर मॉनिटरिंग सर्विस) ने पुष्टि की कि ओजोन परत का छिद्र स्वतः ही ठीक हो गया है।

मुख्य बिंदु

यह छिद्र आर्कटिक के ऊपर 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था। इस छिद्र का निर्माण असामान्य जलवायु परिस्थितियों के कारण हुआ था।

यह छिद्र कैसे बंद हुआ?

इस छिद्र के बंद होने का मुख्य कारण ध्रुवीय भंवर है। वैज्ञानिकों के अनुसार COVID-19 लॉक डाउन होने के कारण प्रदूषण का स्तर कम होना इस छिद्र के बंद होने का कारण नहीं है।

यह ओजोन परत के इतिहास में पाया गया सबसे बड़ा छिद्र था। यदि यह छिद्र दक्षिण की ओर बढ़ा होता, तो इससे मध्य अक्षांशों में भयावह परिणाम उत्पन्न होते।

ध्रुवीय भंवर

ध्रुवीय भंवर एक सर्दियों में होने वाली घटना है। ध्रुवीय भंवर चक्रवाती वृत्ताकार हवाएँ हैं जो पश्चिम से पूर्व की ओर समताप मंडल में चलती हैं।

ओजोन परत

ओजोन परत पृथ्वी के समताप मंडल में एक किस्म की ढाल है जो सूर्य से हानिकारक यू.वी. विकिरण से ग्रह की रक्षा करती है।

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ओजोन छिद्र का सबसे छोटा आकार दर्ज किया गया

नासा के अनुसार हाल ही में दक्षिणी ध्रुव में ओजोन छिद्र के सबसे छोटे आकर को दर्ज किया गया है। वर्ष 2006 में जब ओजोन छिद्र की खोज हुई थी, तब इसका आकार 10.3 मिलियन वर्ग मील था। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक अब इस ओजोन छिद्र का आकर 3.6 मिलियन वर्ग मील दर्ज किया गया है। प्रतिवर्ष सितम्बर व अक्टूबर में ओजोन छिद्र अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचता है तथा दिसम्बर के अंत तक गायब हो जाता है।

ओजोन परत

ओजोन परत गैस की एक सुरक्षा परत है, यह पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। इस परत में ओजोन (O3) की काफी अधिक मात्रा पायी जाती है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हेलॉन तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड जैसे तत्त्व ओजोन परत के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं।

मोंट्रियल प्रोटोकॉल

यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, इसे ओजोन परत के संरक्षण के लिए बनाया गया था। इस संधि पर 26 अगस्त, 1987 को कनाडा के मोंट्रियल में सहमती प्रकट की गयी थी, यह संधि 26 अगस्त, 1989 से लागू हुई थी। इस संधि के बाद मई, 1989 में हेलसिंकी में एक बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में क्लोरोफ्लोरोकार्बन, CTC हेलॉन, मिथाइल ब्रोमाइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड को कम करने पर चर्चा की गयी थे। इस प्रस्ताव के विश्व भर के 197 देशों द्वारा पारित किया गया था। यह संधि काफी सफल भी रही है।

ओजोन परत संरक्षण के लिए विएना सम्मेलन

यह एक बहुराष्ट्रीय समझौता है, इस पर 1985 में सहमती प्रकट की गयी थी और यह 1988 में लागू हुआ था। इस 197 सदस्य देशों द्वारा पारित किया गया है। यह ओजोन परत की संरक्षण के लिए एक फ्रेमवर्क के रूप में कार्य करता है। परन्तु इस समझौते में ओजोन परत को नष्ट करने वाले कारकों को कम करने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।

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