ओडिशा

ओडिशा सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने वाला भारत का पहला राज्य बना

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सभी सरकारी भूमि पर नजर रखने के लिए वेब और मोबाइल आधारित समाधान ‘BLUIS’- भुवनेश्वर भूमि उपयोग खुफिया प्रणाली को 8 जुलाई, 2020 को लांच किया गया। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने  BLUIS को लांच किया।  सरकारी भूमि में अतिक्रमणों का पता लगाने के लिए दशकों से उपयोग किए जा रहे तंत्र के वर्तमान मैनुअल मोड में पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण BLUIS लॉन्च किया गया।

BLUIS

भुवनेश्वर भूमि उपयोग खुफिया प्रणाली (Bhubaneswar Land Use Intelligence System) एक जिओ-टैगेड रिपॉजिटरी है जो भुवनेश्वर में सभी सरकारी भूमि की निगरानी करेगा। यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी का उपयोग करके किया जाएगा।

भूमि पर कब्जा करने वालों द्वारा सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से बचाने के लिए BLUIS के लॉन्च से ओडिशा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सैटेलाइट तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया है।

मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली लांच की गयी (Litigation Management System)

सरकारी अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच ‘एंड टू एंड’ संचार के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली’ नामक ऑनलाइन एप्लीकेशन का लांच किया।  BLUIS और मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली उन 8 प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों में से हैं, जिन्हें 8 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री द्वारा 5T पहल के तहत लॉन्च किया गया था।

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ओडिशा के राज्य वित्त आयोग ने राज्य में पीआरआई और यूएलबी के लिए 23,848 करोड़ रुपये की सिफारिश की

ओडिशा के 5वें राज्य वित्त आयोग द्वारा अगले छह वित्तीय वर्ष (2020-21 से 2025-26) की अवधि में, ओडिशा राज्य में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए 23,848 करोड़ रुपये की राशि की सिफारिश की गई है।

आवंटित किए गए ये फंड राज्य में शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए होंगे ताकि इन संस्थानों और निकायों द्वारा विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं और मौजूदा परिसंपत्तियों का रखरखाव किया जा सके।

जिन परियोजनाओं पर धनराशि पीआरआई और यूएलबी द्वारा निवेश की जाएगी: जल निकासी नेटवर्क, स्वच्छता, पेयजल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य उप केंद्रों और आंगनवाड़ियों का रखरखाव, सड़कों का निर्माण आदि।

फंड्स

  • पंचायत राज संस्थाओं के लिए 15,715.60 करोड़ रुपये
  • शहरी स्थानीय निकायों के लिए 8,132.52 करोड़ रूपये

ये धनराशि सीधे ‘PRIA Soft’- पंचायती राज संस्थाओं के लेखा सॉफ्टवेयर का उपयोग करके पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों) के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी। फंड ट्रांसफर के लिए PRIA सॉफ्ट को IFMS- इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के साथ एकीकृत किया जाएगा।

यह फंड एक वित्तीय वर्ष में दो किश्तों में स्थानांतरित किया जाएगा: पहली किश्त मई-जून में महीनों में जारी की जाएगी जबकि अक्टूबर-नवंबर के महीने में दूसरी किश्त जारी की जाएगी। जारी की जाने वाली दूसरी किश्त के लिए, यूएलबी और पीआरआई को 30 प्रतिशत काम पूरा करना होगा जो उन्होंने वित्तीय वर्ष में प्रदान की गई पहली किश्त के तहत शुरू किया था।

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