करेंसी स्वैप

कैबिनेट ने सार्क देशों के साथ करेंसी स्वैप व्यवस्था में संशोधन को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सार्क देशों (दक्षिण एशियाई देशों का समूह) के साथ करेंसी स्वैप व्यवस्था फ्रेमवर्क में संशोधन को मंज़ूरी दे दी है। इस संशोधन के तहत 400 मिलियन डॉलर की स्टैंडबाई सुविधा की व्यवस्था भी की जायेगी। इससे आवश्यकता पड़ने पर भारत के पास 400 मिलियन डॉलर राशि की स्टैंडबाई सुविधा उपलब्ध रहेगी।

करेंसी स्वैप समझौता (मुद्रा विनिमय) क्या है?

करेंसी स्वैप समझौता एक विदेशी विनिमय समझौता है यह दो पक्षों के बीच में एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा के लिए एक निश्चित समय तक के लिए किया जाता है।

सार्क करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क

सार्क सदस्य देशों के लिए करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क का निर्माण अल्पकालीन विदेशी मुद्रा की आवश्यकता तथा भुगतान शेष की आवश्यकता को पूरा करने के लिए किये गया है। इसे भारत सरकार ने 1 मार्च, 2012 को मंज़ूरी दी थी। इस फ्रेमवर्क के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक प्रत्येक सार्क सदस्य देश को (पिछले दो माह की आयात आवश्यकता के मुताबिक)विभिन्न आकार के करेंसी स्वैप की सुविधा प्रदान कर सकता है। यह राशि 2 अरब डॉलर से अधिक नहीं हो सकती। यह राशि अमेरिकी डॉलर, यूरो अथवा भारतीय रुपये में उपलब्ध होगी।

सार्क तथा भारत को लाभ

सार्क देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने में यह करेंसी स्वैप व्यवस्था काफी उपयोगी सिद्ध होगी तथा इससे क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता में भी वृद्धि होगी। इससे सार्क देशों में भारत की विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी।

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केन्द्रीय कैबिनेट ने जापान के साथ करेंसी स्वैप के समझौते को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जापान के साथ 75 अरब डॉलर के करेंसी स्वैप समझौते को मंज़ूरी दे दी है। यह समझौते भारत-जापान आर्थिक संबंधों में एक मील का पत्थर है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक व सामरिक सहयोग में वृद्धि होगी।

करेंसी स्वैप समझौता (मुद्रा विनिमय) क्या है?

करेंसी स्वैप समझौता एक विदेशी विनिमय समझौता है यह दो पक्षों के बीच में एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा के लिए एक निश्चित समय तक के लिए किया जाता है।

यह समझौता भारत के लिए किस प्रकार लाभदायक है?

  • करेंसी स्वैप (मुद्रा विनिमय) से भारत को आयात का भुगतान करने में आसानी होगी। इससे अवमूल्यन की समस्या भी दूर हो जाएगी।
  • चूंकि मुद्रा विनिमय में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार किया जाता है। दोनों देशों आयात व निर्यात के लिए अपनी मुद्राओं से भुगतान करते हैं। इससे तीसरे पक्ष की मुद्रा की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा मुद्रा विनिमय पर व्यय नहीं करना पड़ता।
  • मुद्रा विनिमय से तरलता को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
  • मुश्किल समय के लिए मुद्रा विनिमय काफी उपयोगी होता है।
  • मुद्रा विनिमय से देश का भुगतान शेष भी स्थिर होता है।

इस मुद्रा विनिमय समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच पिछले वर्ष अक्टूबर में सहमती बनी थी।

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